RamMandirDonationScam : राम मंदिर के दानपात्र से कौन भर रहा अपनी तिजोरी ? :- देश दुनिया के आकर्षण और आस्था का केंद्र है अयोध्या का भव्य श्री राम मंदिर , लेकिन वही मंदिर अब सुर्ख़ियों में है। दरअसल मंदिर के चंदे की राशि में गबन के मामले को किरकिरी होते देख योगी सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है। एसआईटी में विशेष सचिव वित्त, मंडलायुक्त लखनऊ व आईजी रेंज लखनऊ शामिल हैं। एसआईटी पहले सात दिन में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेगी और 15 दिन बाद फाइनल रिपोर्ट देगी।करीब एक सप्ताह पहले चंदे की राशि में गबन करने का मामला सामने आया था। तब से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट गोपनीय तरीके से जांच कर रही है। आधिकारिक तौर पर पुलिस का हस्ताक्षेप नहीं है। लेकिन पुलिस की मदद से ट्रस्ट के पदाधिकारी संदिग्धों से पूछताछ कर रकम की रिकवरी में जुटे हैं।
अब तक वित्तीय गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है: चंपत राय
एसआईटी को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सात दिन में शासन को सौंपना है। इसलिए जांच तेजी से होगी। एसआईटी पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ कर अब तक जुटाए गए साक्ष्यों को भी कब्जे में लेगी। वहीं ट्रस्ट के जिम्मेदारों से भी मामले की जानकारी हासिल करेगी। उसी आधार पर आगे की जांच एसआईटी करेगी।
जानें अभी तक इस पर क्या हुआ?
बताते चलें कि राम मंदिर के दानपात्र से धन गबन के आरोप में रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में छापेमारी कर 10 से 12 लाख रुपये बरामद किए गए। कार्रवाई राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में की गई। बरामदगी आरोपी लवकुश मिश्रा के घर से हुई, जो मंदिर में कर्मी के रूप में कार्यरत रहा है।लवकुश के पिता बच्चूलाल ने बताया कि ट्रस्ट के तीन-चार लोग उनके घर पहुंचे और ताला तोड़कर नकदी अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस धन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी क्योंकि वे गाजियाबाद में रह रहे थे।
विनय कटियार बोले- चोरी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात होगा
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे भाजपा नेता विनय कटियार ने कहा, “राम मंदिर महज एक धार्मिक संरचना नहीं है; यह दशकों के संघर्ष, बलिदान और भक्ति का प्रतीक है। मंदिर से जुड़ा कोई भी भ्रष्टाचार या चोरी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात होगा।” उन्होंने घोषणा की कि वे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिलेंगे और एक ज्ञापन सौंपेंगे जिसमें दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी और अभियोजन की मांग की जाएगी।
लवकुश राम मंदिर में कर्मी के तौर पर कार्यरत रहा
आरोपी युवक लवकुश मिश्रा (27 वर्ष) राम मंदिर में कर्मी के तौर पर कार्यरत रहा। उस पर दानपात्र के चढ़ावे के पैसे का गबन करने का आरोप है। लवकुश के पिता बच्चूलाल ने बताया कि राम मंदिर से चंपत राय सहित तीन-चार लोग उनके घर आए थे।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फैजाबाद में बन रहे मकान का उनके बेटे से कोई संबंध नहीं है। यह मकान उन्होंने अपनी जमीन गिरवी रखकर बनवाया है। मेरा लड़का पिछले 5-6 महीने से राम मंदिर में काम कर रहा था।
उसे वहां रवि मिश्रा ने काम पर लगवाया था। रवि मिश्रा हमारे समधी हैं। फैजाबाद में जिस मकान का निर्माण हो रहा है, उसके लिए हमने बहुत पहले जमीन खरीद ली थी। उस जमीन और मकान से मेरे लड़के का कोई लेना-देना नहीं है। मैं करीब 10-12 बीघा खेत गिरवी रखकर मकान बनवा रहा हूं। मेरा लड़का जो पैसा राम मंदिर से लेकर आया था, उसे जो लोग यहां आए थे, वे अपने साथ लेकर चले गए। अब उससे हमारा कोई मतलब नहीं है।
एसआईटी को तलाशने होंगे कई जवाब
राम मंदिर के दानपात्र से धन गबन प्रकरण की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उनके दौरे पर सबकी निगाहें दान विवाद को लेकर संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी थीं, लेकिन उन्होंने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से साफ इन्कार कर दिया।
महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, “मैं केवल निर्माण कार्य देखता हूं और कुछ नहीं।” इसके बाद उन्होंने दान प्रकरण से जुड़े किसी भी अन्य सवाल का जवाब नहीं दिया। नृपेंद्र मिश्र का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर में दान राशि के गबन को लेकर ट्रस्ट और पुलिस स्तर पर जांच चल रही है तथा मामले में कई कर्मचारियों से पूछताछ और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

