By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
  • उत्तराखण्ड
    • देहरादून
    • रुड़की
    • चमोली
    • रुद्रप्रयाग
    • टिहरी गढ़वाल
    • पौड़ी गढ़वाल
    • उत्तरकाशी
    • अल्मोड़ा
    • उधम सिंह नगर
    • चम्पावत
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • बागेश्वर
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्ली
    • पंजाब
    • महाराष्ट्र
  • अंतराष्ट्रीय
  • तत्काल प्रभाव
  • खोजी नारद कहिंन
  • तत्काल प्रभाव
  • More
    • बकैती
    • भांडा फोड़
    • लफ्फाज़ी
    • वीडियो
Reading: भारत में सबसे ज्यादा सोना किस मंदिर में है: पद्मनाभस्वामी मंदिर
Share
Notification Show More
Aa
khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
Aa
Search
  • उत्तराखण्ड
  • खोजी नारद कहिंन
  • तत्काल प्रभाव
  • इंटरव्यू
  • बकैती
  • भांडा फोड़
  • लफ्फाज़ी
  • वीडियो
Follow US
  • Advertise
© 2024 Khoji narad. All Rights Reserved.
khojinarad HIndi News > Uncategorized > भारत में सबसे ज्यादा सोना किस मंदिर में है: पद्मनाभस्वामी मंदिर
Uncategorized

भारत में सबसे ज्यादा सोना किस मंदिर में है: पद्मनाभस्वामी मंदिर

Khoji Narad Desk
Last updated: 2024/10/01 at 9:30 AM
Khoji Narad Desk
Share
6 Min Read
SHARE

भारत, अपनी समृद्ध संस्कृति, विविधता और ऐतिहासिक स्थलों के लिए जाना जाता है। इसके धार्मिक स्थलों में से एक है पद्मनाभस्वामी मंदिर, जो केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित है। यह मंदिर न केवल भगवान विष्णु की आराधना का स्थल है, बल्कि इसके अंदर छिपे हुए अनगिनत खजाने के लिए भी प्रसिद्ध है। 2011 में, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर का निरीक्षण किया गया, तब यह पता चला कि मंदिर में विशाल मात्रा में सोना और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं छिपी हुई हैं। इस लेख में, हम इस मंदिर के इतिहास, खजाने, और उसके रहस्यों की चर्चा करेंगे।

Contents
1. पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास2. मंदिर की वास्तुकला3. खजाने का रहस्य3.1 खजाने के स्रोत3.2 खजाने का विभाजन4. सातवां द्वार4.1 खोलने का रहस्य5. भक्तों की आस्था5.1 विशेष अनुष्ठान6. सामाजिक और आर्थिक प्रभाव7. निष्कर्ष

1. पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास

पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास लगभग 5000 वर्ष पुराना माना जाता है। इसे 8वीं सदी में स्थापित किया गया था, और इसके निर्माण में विभिन्न वास्तु शिल्प शैलियों का समावेश किया गया है। मंदिर की मुख्य मूर्ति भगवान विष्णु की है, जो ‘पद्मनाभ’ के नाम से जानी जाती है, जिसका अर्थ है “कमल से उत्पन्न होने वाला”। मंदिर का प्रबंधन तिरुवनंतपुरम के महाराजाओं के पास था, जिन्होंने मंदिर को संरक्षण और पोषण दिया।

2. मंदिर की वास्तुकला

पद्मनाभस्वामी मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली की एक अद्वितीय मिसाल है। मंदिर की भव्यता और उसकी वास्तुकला इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। यहाँ की गोपुरम (मुख्य प्रवेश द्वार) और विभिन्न मंडप भव्यता और नक्काशी से भरे हुए हैं। मंदिर का मुख्य गर्भगृह भी विशेष ध्यान आकर्षित करता है, जहाँ भगवान विष्णु की मूर्ति एक कमल के आकार में स्थापित है।

3. खजाने का रहस्य

2011 में, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर की संपत्ति का मूल्यांकन किया गया। इस दौरान जो खजाना पाया गया, वह विश्व के सबसे बड़े धार्मिक खजानों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में लगभग 1,00,000 करोड़ रुपये (लगभग 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का सोना और अन्य मूल्यवान वस्तुएं मिलीं। इसमें सोने की मुद्राएँ, आभूषण, और बहुमूल्य रत्न शामिल थे।

3.1 खजाने के स्रोत

पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने का एक बड़ा हिस्सा राजाओं और रजवाड़ों द्वारा दी गई भेंटों से आता है। तिरुवनंतपुरम के महाराजाओं ने अपने शासन के दौरान इस मंदिर को विभिन्न प्रकार की समृद्धि और खजाना प्रदान किया। इसके अलावा, भक्तों द्वारा किए गए दान ने भी खजाने में वृद्धि की।

3.2 खजाने का विभाजन

जब खजाने की खोज की गई, तब यह ध्यान में आया कि इसे सही तरीके से प्रबंधित नहीं किया गया था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रशासन को निर्देश दिया कि वे इस खजाने का उचित प्रबंधन करें और इसे सार्वजनिक कल्याण के लिए उपयोग में लाएँ।

4. सातवां द्वार

पद्मनाभस्वामी मंदिर का सातवां द्वार एक और रहस्य है, जो इसे और भी रहस्यमय बनाता है। कहा जाता है कि यह द्वार कभी नहीं खोला गया है और इसके पीछे अनगिनत खजाने और रहस्यों का भंडार हो सकता है। इसके बारे में कई मान्यताएँ और किंवदंतियाँ प्रचलित हैं।

4.1 खोलने का रहस्य

कई लोगों का मानना है कि इस द्वार को खोलने के लिए विशेष अनुष्ठान और मंत्रों की आवश्यकता है। यह भी कहा जाता है कि यदि इसे गलत तरीके से खोला गया, तो अनर्थ हो सकता है। इस कारण से, मंदिर प्रशासन ने इसे सुरक्षित रखा है और इसके रहस्य को संरक्षित करने का प्रयास किया है।

5. भक्तों की आस्था

पद्मनाभस्वामी मंदिर केवल खजाने के लिए ही नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था और भक्ति का भी प्रतीक है। यहाँ प्रतिदिन हजारों भक्त भगवान विष्णु की पूजा करने आते हैं। यहाँ के अनुष्ठान और धार्मिक गतिविधियाँ भक्तों के लिए एक अद्वितीय अनुभव प्रस्तुत करती हैं।

5.1 विशेष अनुष्ठान

मंदिर में कई विशेष अनुष्ठान होते हैं, जो भक्तों को आकर्षित करते हैं। इनमें से कुछ अनुष्ठान केवल विशेष वर्ग के ब्राह्मणों द्वारा किए जाते हैं।

6. सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

पद्मनाभस्वामी मंदिर का खजाना और इसकी प्रसिद्धि तिरुवनंतपुरम और उसके आसपास के क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह स्थान न केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र है, बल्कि स्थानीय व्यवसायों को भी बढ़ावा देता है।

7. निष्कर्ष

पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत के सबसे अमीर और रहस्यमय धार्मिक स्थलों में से एक है। इसके खजाने ने इसे एक अद्वितीय पहचान दी है और इसे न केवल भक्तों के लिए, बल्कि इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना दिया है।

इस मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्वता इसे एक ऐसी जगह बनाती है जहाँ आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम होता है। भविष्य में भी, यह मंदिर अपने रहस्यों और खजाने के साथ भक्तों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहेगा।

You Might Also Like

ChildAbuseIndia : रिश्तों की नींव को हिला देने वाले शर्मनाक अपराध

SaraswatiVas : जानें मां सरस्वती के वास का रहस्य

DoonHospital : क्यूआर कोड स्कैन कर घर बैठे करें दून अस्पताल में पंजीकरण

UttarakhandHighCourt : आपसी सहमति से संबंध बनाने पर बड़ा फैसला 

SwamiVivekanandaCorridor : स्वामी विवेकानंद कॉरिडोर बनाएगी उत्तराखंड सरकार

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.
[mc4wp_form]
By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Khoji Narad Desk October 1, 2024 October 1, 2024
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article padmanaabhasvaamee mandir ka saatavaan dvaar पद्मनाभस्वामी मंदिर का रहस्य
Next Article मुख्यमंत्री का शहीदों को नमन मुख्यमंत्री ने किया शहीदों को नमन

Advt.

Advt.

https://khojinarad.com/wp-content/uploads/2025/10/Vertical-V1-MDDA-Housing-1.mp4

Advt.

https://khojinarad.com/wp-content/uploads/2025/10/MDDA-Final-Vertical-2-1.mp4

Latest News

AIProsCons
AIProsCons : AI की एंट्री वरदान या खतरा?
खोजी नारद ब्रेकिंग न्यूज़ January 17, 2026
HIVMotherDeath
HIVMotherDeath : 10 साल के मासूम ने कराया माँ का पोस्टमार्टम
राज्य January 17, 2026
UttarakhandAppleProduction
UttarakhandAppleProduction : प्रदेश में बढ़ेगा सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट का उत्पादन
देहरादून January 17, 2026
ChildAbuseIndia
ChildAbuseIndia : रिश्तों की नींव को हिला देने वाले शर्मनाक अपराध
Uncategorized January 17, 2026
//

Khoji Narad is a Uttarakhand-based news website that delivers comprehensive coverage of national and international news. With a focus on accurate, timely, and in-depth reporting, Khoji Narad offers insights into politics, business, culture, and more, while also highlighting the unique stories from the heart of Uttarakhand.

Quick Link

  • इंटरव्यू
  • खोजी नारद कहिंन
  • बकैती
  • भांडा फोड़
  • लफ्फाज़ी
  • वीडियो

Top Categories

  • उत्तराखण्ड
  • अंतराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • महाराष्ट्र

Contact

Smriti Sahgal (Editor)
Address: 207/4, Vijaypur, Gopiwala, Anarwala Dehradun-248001, Uttarakhand
Phone: 9837663626
Email: indiankhojinarad@gmail.com

 

khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
Follow US
© 2024 Khoji Narad. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Register Lost your password?