टैक्स और टैरिफ में क्या फर्क है? :- नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करेंगे एक ऐसे टॉपिक की जो अक्सर कंफ्यूज़ करता है, टैक्स और टैरिफ, दोनों शब्द सुनने में मिलते जुलते लगते हैं, लेकिन असल में दोनों अलग हैं, अमेरिका का नया टैरिफ, हाल ही में अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर 50% का टैरिफ लगा दिया है, पहले यह 25% था और फिर रूस से तेल खरीद को लेकर 25% और जोड दिया गया।
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यानी अब भारतीय सामान अमेरिका में आयात होने पर दोगुना महंगा पड जाएगा, टैक्स क्या होता है, टैक्स वह रकम है, जो हर व्यक्ति, कंपनी या संस्था अपनी कमाई का हिस्सा सरकार को देता है, अगर आप सैलरी पाते हैं तो इनकम टैक्स भरते हैं, कंपनियां अपने मुनाफे पर कॉर्पोरेट टैक्स देती हैं, घर और ज़मीन पर प्रॉपर्टी टैक्स लगता है, और सामान की खरीद पर सेल्स टैक्स या जीएसटी, सरकार इस टैक्स से मिली रकम का इस्तेमाल सडकों, स्कूलों, अस्पतालों और विकास परियोजनाओं में करती है।
टैरिफ क्या होता है, टैरिफ, टैक्स से थोडा अलग है, यह विदेश से आने वाले सामान और सेवाओं पर लगाया गया शुल्क है, इसका मकसद दो चीज़ें होती हैं, पहला, विदेशी सामान को महंगा बनाना, और दूसरा, अपने देश के उद्योगों को बढ़ावा देना, टैरिफ के प्रकार, टैरिफ दो तरह के होते हैं, स्पेसिफिक टैरिफ, जैसे प्रति किलो चावल पर 10 रुपये, एड वेलोरेम टैरिफ, यानी जितना महंगा सामान, उतना ज़्यादा प्रतिशत टैरिफ, असली फर्क, तो अब फर्क साफ है।
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टैक्स, देश के अंदर की कमाई और लेन देन पर, टैरिफ, बाहर से आने वाले सामान पर, दोनों से सरकार की कमाई बढ़ती है, लेकिन टैक्स से देश का इंफ्रास्ट्रक्चर बनता है, जबकि टैरिफ से घरेलू उद्योग सुरक्षित रहते हैं, तो अगली बार जब आप टैक्स और टैरिफ का नाम सुनें, याद रखिए, टैक्स मतलब आपकी कमाई और टैरिफ मतलब विदेशी सामान की कीमत, यही है दोनों के बीच का साफ अंतर।

