राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे भारत की दो दिवसीय यात्रा पर कल नई दिल्ली पहुंचे थे।
इस दौरान विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया।
वहीं, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बीती शाम श्रीलंकाई राष्ट्रपति से मुलाकात की।
भारत-श्रीलंका मना रहे राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ। ।
श्रीलंका में राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद भारत की उनकी ये पहली यात्रा है।
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों को और आगे बढ़ाना व मजबूत करना है।
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और श्रीलंका इस वर्ष राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।
कैसे रहे हैं भारत और श्रीलंका के संबंध ?
भारत और श्रीलंका के संबंध 2500 वर्ष से अधिक समय से पुराने हैं।
दोनों देशों की बौद्धिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और परस्पर भाषाई संबंधों की एक विरासत है।
हाल ही के वर्षों में, सभी स्तरों पर दोनों देशों के संबंधों में प्रगाढ़ता आई है।
व्यापार और निवेश बढ़ा है तथा विकास, शिक्षा, संस्कृति और रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग किया जाता रहा है।
दोनों देश अंतरराष्ट्रीय रुचि के प्रमुख मुद्दों पर व्यापक समझ रखते हैं।
दोनों देशों के बीच होंगे अहम समझौते। ।
आज दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ता के दौरान पीएम मोदी और विक्रमसिंघे आपसी हितों के कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
वार्ता के बाद कई एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
इससे पहले विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुरुवार शाम श्रीलंकाई राष्ट्रपति से मुलाकात की।
विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि रानिल विक्रमसिंघे की ये यात्रा दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगी और भारत की नेबरहुड फर्स्ट और सागर नीतियों को आगे बढ़ाएगी।
भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और क्षेत्र में श्रीलंका महत्वपूर्ण भागीदार। ।
श्रीलंका के राष्ट्रपति आज शाम राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे।
श्रीलंका भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और क्षेत्र में सभी के लिए सागर सुरक्षा और विकास दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों को और आगे बढ़ाना व मजबूत करना है।
वहीं, राष्ट्रपति विक्रमसिंघे की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और श्रीलंका इस वर्ष राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।
आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों और श्रीलंका की जनसंख्या के वंचित वर्गों के लिए विकासात्मक सहायता परियोजनाओं के कार्यान्वयन में हुई महत्वपूर्ण प्रगति से दोनों देशों की मित्रता में और प्रगाढ़ता आई है।
हाल के वर्षों में श्रीलंका की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर भारत ने बुरे वक्त में आर्थिक मदद देकर एक पड़ोसी धर्म को निभाया।
श्रीलंका ने भी हाल ही में भारत को अपना सच्चा साथी कहकर बता दिया कि श्रीलंका के लिए भारत सबसे अहम है।

