InfectionSigns : इंफेक्शन होने से पहले दिखते हैं ये 7 लक्षण :- आपके शरीर को अगर Hawkins जैसा शहर मानें, तो इंफेक्शन वही उपसाइड डाउन के मॉन्स्टर हैं जिनसे रोज लड़ाई चलती रहती है. कई बार शरीर बिना किसी शोर-शराबे के इन लड़ाइयों को जीत भी लेता है. लेकिन कुछ शुरुआती संकेत ऐसे होते हैं, जो हम थकान, स्ट्रेस या मौसम बदलने की वजह समझ कर अनदेखा कर देते हैं कोई इंफेक्शन शुरुआत में इसलिए छिपे रहते हैं क्योंकि शरीर उन्हें कंट्रोल में रख लेता है और हल्के, मिलते-जुलते लक्षण देता है. लोग पेनकिलर लेकर बुखार भी दबा देते हैं, जिससे असल परेशानी छिप जाती है. इसलिए हल्के लेकिन लगातार बदलते लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।
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अगर आप हाल ही में ज्यादा थकान, कमजोरी या सुस्ती महसूस कर रहे हैं, तो यह सिर्फ नींद की कमी नहीं हो सकती. शरीर जब इंफेक्शन से लड़ता है, तो एनर्जी इम्यून सिस्टम में लगती है, जिससे कमजोरी आती है. अगर आराम करने पर भी ऊर्जा वापस नहीं आती, तो किसी छिपे इंफेक्शन पर शक होना चाहिए।
हल्का-सा चढ़ा हुआ तापमान, बार-बार ठंड लगना या रात में पसीना आना भी शुरुआती संकेत हो सकते हैं. यह बड़े बुखार जैसा नहीं लगता, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन बिना वजह कई दिनों तक ऐसे लक्षण बने रहें तो डॉक्टर से सलाह जरूरी है।
शरीर में बिना कारण दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव या जोड़ों में हल्की तकलीफ भी इंफेक्शन का संकेत हो सकते हैं. यह अक्सर सूजन के कारण होता है, जिसे लोग स्ट्रेस या थकान समझकर टाल देते हैं. लेकिन अगर यह दूसरे हल्के लक्षणों के साथ दिखे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए अगर आपको अचानक भूख कम लग रही है, पेट में मरोड़, हल्का मिचली या दस्त जैसे लक्षण हो रहे हैं, तो यह सिर्फ बदहजमी नहीं. कई बार आंतों में इंफेक्शन या शरीर में चल रही लड़ाई का असर पेट पर भी दिखाई देता है. लगातार बदलाव पर ध्यान देना जरूरी है।
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नाक बंद रहना, हल्की खांसी, गले में खराश या सांस लेने में बदलाव शुरुआत में मामूली लगते हैं. लेकिन अगर यह साधारण जुकाम से ज्यादा दिन टिक जाएं, तो यह शरीर के किसी वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन से लड़ने का संकेत है गर्दन, बगल या कमर के पास लिम्फ नोड्स का सूजना बताता है कि शरीर इम्यून सेल्स बना रहा है. इसी तरह बिना चोट के किसी हिस्से पर लालिमा या गर्माहट भी इंफेक्शन की ओर इशारा कर सकती है. कई बार ये संकेत छोटे होते हैं, लेकिन काफी अहम होते हैं।
मूड बिगड़ना, ज्यादा चिड़चिड़ापन, दिमाग का भारी लगना या ब्रेन फॉग भी इंफेक्शन का हिस्सा हो सकते हैं. शरीर जब लगातार अंदर लड़ रहा होता है, तो इसका असर दिमाग की ऊर्जा और फोकस पर पड़ता है. यह अक्सर स्ट्रेस समझा जाता है, लेकिन असल वजह इंफेक्शन भी हो सकती है।

