साकार हो रही ‘ग्रीन दून, क्लीन दून’ की सोच :- मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी देहरादून शहर को हरा-भरा, स्वच्छ और सुंदर बनाने में बेहतरीन कामयाबी हासिल कर रहे हैं। उनकी सोच सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें ज़मीन पर उतारने का दृढ़ संकल्प भी है। कभी वादियों, ठंडी बयार और घनी हरियाली के लिए पहचाना जाने वाला शहर – पिछले दशक में अनियोजित विकास और बढ़ती आबादी के बोझ से दबने लगा था।
कंक्रीट के जंगलों और जाम ने शहर की सांसें रोक दी थीं। लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है। एमडीडीए देहरादून को आधुनिकता व परंपरा के संतुलन के साथ विकसित कर रहा है। ‘ग्रीन दून, क्लीन दून’ इस विज़न की नींव है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस विश्वास के साथ बंशीधर तिवारी को यह जिम्मेदारी दी, वह अब शहर के बदलते स्वरूप में झलकने लगी है।
राजधानी बनने के बाद पेड़ कटे, कंक्रीट बढ़ा और दून की पहचान खोने लगी। अब सड़कों के किनारे, डिवाइडरों और कालोनियों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण हो रहा है। गंगोत्री विहार के पास नया पार्क और सहस्त्रधारा रोड पर सिटी फॉरेस्ट पार्क जैसे प्रोजेक्ट शहर को नया जीवन दे रहे हैं।
प्रदूषण घटाने और प्राकृतिक संतुलन बनाने के लिए औषधीय और छायादार पौधों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।आढ़त बाजार को ब्राह्मणवाला में शिफ्ट किया जा रहा है। 10 हेक्टेयर में बनने वाला यह नया मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग और पिंक टॉयलेट जैसी सुविधाओं से लैस होगा। इससे शहर का बॉटलनेक खुलेगा और ट्रक-जाम से फैलने वाला प्रदूषण घटेगा।
बंशीधर तिवारी ने एमडीडीए की कार्यप्रणाली में तेजी और पारदर्शिता जोड़ी है। अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। बेसमेंट पार्किंग और मानकों के उल्लंघन पर कड़ी निगरानी है। आईएसबीटी परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने और पहाड़ी शैली में फेसाड तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सहस्त्रधारा रोड पर तैयार हुआ सिटी फॉरेस्ट पार्क अब शहर के लिए हरे फेफड़ों जैसा है। साइकिल ट्रैक, जॉगर्स पार्क, योगा क्लास, भूल-भुलैया और बच्चों के लिए एक्टिविटीज़ इसे हर उम्र के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रही हैं। यहां रोजाना करीब दो हजार लोग पहुंच रहे हैं।धौलास क्षेत्र में पीएम आवास योजना के तहत 240 ईडब्ल्यूएस मकान तेजी से बन रहे हैं। साथ ही मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना को बढ़ावा देने के लिए राज्यस्तरीय कार्यशाला की तैयारी है। इसका मकसद रोजगार सृजन और ग्रुप हाउसिंग को सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर बनाना है।
एमडीडीए अब खुद की नर्सरी तैयार कर रहा है, जिससे पौधरोपण के लिए बाहरी निर्भरता कम होगी। एक लाख पौधों के लक्ष्य का 80 प्रतिशत पूरा भी हो चुका है। फलदार और छायादार पेड़ों पर विशेष जोर है। नेहरू कॉलोनी में एमडीडीए का नया ऑफिस बनेगा। ईको रिसॉर्ट, गेस्ट हाउस और लैंड पुलिंग जैसी योजनाओं को भी बोर्ड की मंजूरी मिल चुकी है। यह सब मिलकर प्राधिकरण के कामकाज में नई गति ला रहे हैं। 15 साल बाद एमडीडीए ने खुद की जेसीबी खरीदी है। अब अवैध प्लॉटिंग या ध्वस्तीकरण कार्यों के लिए किराये पर निर्भरता नहीं रहेगी। यह आत्मनिर्भरता प्राधिकरण की सख्ती और प्रतिबद्धता का संकेत है।

