PocsoActSupremeCourt : स्कूल में यौन-शोषण की जानकारी छुपायी, तो प्रिंसिपल, होंगे जिम्मेदार :- कई बार यह देखने में आता है कि स्कूलों में जब कोई बच्चा अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में स्कूल अधिकारियों से शिकायत करता है, तो स्कूल में ही जांच होने की बात कह कर मामला दबा दिया जाता है। ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बाल यौन शोषण मामलों में अनिवार्य रिपोर्टिंग को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी स्कूल अधिकारी को पीड़ित बच्चे से सीधे यौन अपराध की जानकारी मिलती है तो वह स्वयं जांच करने या तथ्यों का सत्यापन करने का अधिकार नहीं रखता। POCSO Act में साफ प्रावधान हैं कि इस तरह की घटना होने पर जानकारी मिलते ही पुलिस या सक्षम प्राधिकारी को सूचना देना कानूनी दायित्व है।
यह मामला असम के एक स्कूल से जुड़ा है। लाईव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार यहां एक नाबालिग छात्रा ने कथित तौर पर अपनी हेडमिस्ट्रेस को यौन शोषण की जानकारी दी थी। आरोप थे कि आठवी कक्षा के छात्र ने उसका यौन उत्पीड़न किया था। लेकिन बच्ची के जरिए और फिर बच्ची की मां की शिकायत के बाद भी सूचना मिलने के बावजूद स्कूल प्रशासन ने पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी।
बच्ची की मां ने मामले में इंसाफ के लिए लेकर ट्रायल कोर्ट और फिर गुवाहाटी हाई कोर्ट में गुहार लगाई थी। लेकिन हाईकोर्ट के द्वारा स्कूल अधिकारियों – जिनमें हेडमिस्ट्रेस, प्रिंसिपल, शिक्षक और हॉस्टल वार्डन शामिल थे – को आरोपमुक्त करने के फैसला आने से, अंत में सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
सुप्रीम कोर्ट का अवलोकन और POCSO Act में अनिवार्य रिपोर्टिंग
बच्ची की मां की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने सुनवाई की , सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी स्कूल अधिकारी का यह कहना पर्याप्त नहीं है कि उसने पहले स्वयं मामले की जांच की और अपराध नहीं पाया।
POCSO Act की धारा 19 किसी भी व्यक्ति पर यह कानूनी दायित्व डालती है कि यदि उसे बाल यौन अपराध की जानकारी हो तो वह तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करे। कानून का उद्देश्य अपराध को छिपाने के बजाय त्वरित हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।
कोर्ट ने कहा कि अपराध हुआ या नहीं, इसका निर्णय पुलिस और सक्षम जांच एजेंसियां करेंगी, न कि स्कूल प्रशासन। इसलिए किसी अधिकारी द्वारा स्वयं निष्कर्ष निकाल लेना कानूनी जिम्मेदारी से मुक्ति का आधार नहीं बन सकता और फिर शीर्ष अदालत स्कूल की हेड मिस्ट्रेस के खिलाफ POCSO Act के तहत मामला चलाए जाने को अनुमति दे दी।

