Numerology : चेस बोर्ड और आपका मूलांक ! :- क्या आपने कभी गौर किया है कि आपकी जन्म तारीख और शतरंज के मोहरों के बीच कोई गहरा कनेक्शन है? अंकविद्या के अनुसार, मूलांक 1 से लेकर 9 तक के अंकों की अपनी एक खास ऊर्जा होती है, जो बिल्कुल शतरंज की चालों और मोहरों के स्वभाव से मेल खाती है. आइए जानते हैं कि आपके मूलांक के आधार पर आप जिंदगी के इस बड़े खेल में कौन सा मोहरा हैं।
आप हैं जिंदगी की बाजी के ‘राजा’
जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 1 बनता है. इस अंक के स्वामी सूर्य हैं, जो ग्रहों के राजा हैं. शतरंज के खेल में ‘राजा’ सबसे महत्वपूर्ण मोहरा होता है, भले ही वह सीमित कदम चलता है लेकिन पूरा खेल उसी के इर्द-गिर्द घूमता है. मूलांक 1 वाले लोग भी जन्मजात लीडर होते हैं. वे भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाते हैं और अपने जीवन के सारे बड़े फैसले खुद लेना पसंद करते हैं।
मूलांक 5: क्या आप हैं सबसे ताकतवर ‘रानी’?
अगर आपकी जन्म तारीख 5, 14 या 23 है, तो आपका मूलांक 5 है और इसके स्वामी बुध ग्रह हैं. शतरंज के बोर्ड पर ‘रानी’ यानी वजीर सबसे शक्तिशाली और तेज मोहरा माना जाता है जो किसी भी दिशा में जा सकता है. मूलांक 5 वाले लोग अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता, तेज दिमाग और बेहतरीन कूटनीति के लिए जाने जाते हैं. ये किसी भी मुश्किल परिस्थिति में अपनी चाल बदलकर तुरंत बाजी पलटना अच्छी तरह जानते हैं और इनकी ऊर्जा इन्हें हमेशा सबसे आगे रखती है।
मूलांक 3: दूरदर्शी सोच वाले ‘ऊँट’ की तरह आपकी चाल
किसी भी महीने की 3, 12, 21 या 30 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 3 होता है, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं. शतरंज में ‘ऊँट’ हमेशा तिरछी और लंबी दूर की छलांग लगाता है. मूलांक 3 वाले लोग भी अपनी दूरदर्शिता,उच्च ज्ञान और गहरी सोच के लिए जाने जाते हैं. वे आने वाले समय की स्थिति को बहुत पहले भांप लेते हैं. उनका यह ज्ञानी और दार्शनिक स्वभाव उन्हें जीवन की हर पहेली को आसानी से सुलझाने की शक्ति देता है।
मूलांक 7: रहस्यमयी ‘घोड़े’ जैसी है आपकी पेचीदा चाल
जिन जातकों की जन्म तारीख 7, 16 या 25 है, उनका मूलांक 7 है और इसके ग्रह स्वामी केतु हैं. शतरंज में ‘घोड़े’ की ढाई घर की ‘L’ शेप चाल सबसे अनोखी और पेचीदा होती है, जो बड़ी से बड़ी रुकावटों को आसानी से कूद जाती है. मूलांक 7 वाले लोग भी लीक से हटकर (Out of the box) सोचते हैं. उनका रहस्यमयी और अंतःप्रेरणा से भरा स्वभाव आम लोगों से अलग होता है, और उनकी अगली चाल का अनुमान लगाना किसी के लिए भी आसान नहीं होता।
मूलांक 8: अटूट धैर्य और शक्ति के प्रतीक ‘हाथी’
यदि आपकी जन्मतिथि 8, 17 या 26 है, तो आपका मूलांक 8 है, जिसका संचालन न्याय के देवता शनि करते हैं. शतरंज के खेल में ‘हाथी’ सीधे रास्ते पर पूरी ताकत, स्थिरता और अटूट धैर्य के साथ हमला करता है. मूलांक 8 वाले लोग जीवन के ‘लॉन्ग-गेम’ के पक्के खिलाड़ी होते हैं. शुरुआती संघर्ष के बाद इनकी मेहनत रंग लाती है, और ये अपने पक्के इरादों के दम पर अंततः एक बहुत बड़ी और स्थाई सफलता हासिल करते हैं।
मूलांक 2: कोमल मन और संतुलन बनाने वाले खिलाड़ी
महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को जन्म लेने वाले लोगों का मूलांक 2 होता है, जिसके स्वामी मन के कारक चंद्रमा हैं. शतरंज की बिसात पर संतुलन और बचाव बहुत जरूरी होता है. मूलांक 2 वाले लोग स्वभाव से बेहद शांत, संवेदनशील और रचनात्मक होते हैं. ये अकेले लड़ने के बजाय टीम वर्क और आपसी तालमेल में विश्वास रखते हैं. इनका यह कूटनीतिक और सहयोगी स्वभाव परिवार और समाज में इन्हें सबका प्रिय बनाता है और ये रिश्तों को बहुत अच्छे से संभालते हैं।
मूलांक 4: मास्टर रणनीतिकार जो पलट सकते हैं पासा
जिन लोगों का जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 4 बनता है और इसके स्वामी राहु हैं. चेस के खेल में कई बार ऐसी चालें चली जाती हैं जो पूरी बाजी का रुख बदल देती हैं. मूलांक 4 वाले लोग भी अपनी असाधारण तकनीकी सोच, लीक से हटकर काम करने की आदत और तीखे तेवर के लिए पहचाने जाते हैं. ये नियमों के दायरे में रहकर भी ऐसा अनोखा रास्ता निकालते हैं जो बड़े-बड़े धुरंधरों को भी हैरान कर देता है।
मूलांक 6: आकर्षण और स्मार्ट प्ले
किसी भी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को जन्मे जातकों का मूलांक 6 होता है, जिसके स्वामी सुख-वैभव के कारक ग्रह शुक्र हैं. शतरंज के खेल में जिस तरह हर मोहरे की अपनी कलात्मक स्थिति होती है, वैसे ही मूलांक 6 वाले लोग अपनी कला, सुंदरता, आकर्षण और शालीनता के लिए जाने जाते हैं. ये अपनी मीठी वाणी और समझदारी से बिना किसी बड़े टकराव के अपने विरोधियों को भी अपना मुरीद बना लेते हैं और अपनी हर चाल बहुत सधे हुए तरीके से चलते हैं।
मूलांक 9 और प्यादे: संघर्ष से शिखर तक का सफर
मूलांक 9 जन्मतिथि 9, 18, 27 के स्वामी मंगल हैं, जो साहस और ऊर्जा के प्रतीक हैं. वहीं शतरंज में छोटे ‘प्यादे’ सबसे नीचे से अपनी यात्रा शुरू करते हैं, लेकिन जब वे लगातार आगे बढ़कर बोर्ड के आखिरी छोर पर पहुंच जाते हैं, तो वे खुद ‘रानी’ बन जाते हैं. मूलांक 9 वाले भी साहसी और योद्धा प्रवृत्ति के होते हैं. यह संयोजन हमें सिखाता है कि जीवन में शुरुआती संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर आप डटे रहें तो साधारण इंसान भी असाधारण मुकाम पा सकता है ।

