DelhiProtest : दिल्ली में लोकतंत्र की सबसे बड़ी लड़ाई? किसान आंदोलन और संसद मार्च से हड़कंप! :- दिल्ली… जहां आज सिर्फ संसद का मानसून सत्र ही नहीं, बल्कि सड़कों पर लोकतंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा भी देखने को मिली। एक तरफ हजारों किसान अपने अधिकारों की आवाज़ बुलंद करने के लिए दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे… तो दूसरी तरफ जंतर-मंतर से संसद तक छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाज़ी ने राजधानी का माहौल पूरी तरह गर्मा दिया। सवाल सिर्फ विरोध का नहीं… बल्कि उस टकराव का है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में किसान संगठनों ने आज दिल्ली कूच का ऐलान किया। किसानों का कहना है कि यदि यह समझौता लागू हुआ, तो खेती, डेयरी, छोटे व्यापारी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी आशंका को लेकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों से किसान दिल्ली पहुंचने के लिए रवाना हुए।
दिल्ली की सीमाओं पर प्रशासन पहले से ही अलर्ट दिखाई दिया। शंभू बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई, जबकि JCB मशीनें और क्रेन भी तैयार रखी गईं ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। हालांकि नेशनल हाईवे पूरी तरह बंद नहीं किया गया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही।
उधर, राजधानी के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को लेकर CJP समर्थकों और छात्रों का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। सोमवार को संसद की ओर बढ़ते प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए। पुलिस के अनुसार, इस दौरान 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा और लगभग 70 लोगों को हिरासत में लिया गया। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल भी गरमा दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि आम आदमी पार्टी के नेताओं ने घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनका समर्थन किया। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार ने पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई की है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
इधर किसान संगठन भी अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रस्तावित ट्रेड डील पर सरकार स्पष्ट जवाब नहीं देती और किसानों के हित सुरक्षित नहीं किए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अफवाहों से बचने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील कर रहा है।
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दिल्ली की सड़कों पर आज सिर्फ भीड़ नहीं थी… बल्कि सवालों का सैलाब था। कहीं किसान अपनी जमीन और रोज़गार बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं… तो कहीं छात्र अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें सरकार, संसद और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं। क्या बातचीत से समाधान निकलेगा या आंदोलन और तेज होगा? इसका जवाब आने वाले दिन तय करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल भी गरमा दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि आम आदमी पार्टी के नेताओं ने घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनका समर्थन किया। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार ने पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई की है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
इधर किसान संगठन भी अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रस्तावित ट्रेड डील पर सरकार स्पष्ट जवाब नहीं देती और किसानों के हित सुरक्षित नहीं किए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अफवाहों से बचने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील कर रहा है।
दिल्ली की सड़कों पर आज सिर्फ भीड़ नहीं थी… बल्कि सवालों का सैलाब था। कहीं किसान अपनी जमीन और रोज़गार बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं… तो कहीं छात्र अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें सरकार, संसद और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं। क्या बातचीत से समाधान निकलेगा या आंदोलन और तेज होगा? इसका जवाब आने वाले दिन तय करेंगे।

