HeartAttackRisk : बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, वजह एनर्जी ड्रिंक, स्मोकिंग या नींद ? :- आज के समय में हार्ट अटैक जैसी समस्याएं भी काफी आम होने लगी हैं और इसके मामले काफी तेजी से बढ़ने लगे हैं। पहले जहां ज्यादा उम्र के लोगों या फिर किसी क्रोनिक बीमारी से जूझ रहे लोगों में हार्ट अटैक के ज्यादा मामले देखे जाते थे, वहीं आज के समय में कम उम्र से स्वस्थ और हष्ट-पुष्ट लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ते देखे जा रहे हैं। आज की नई जनरेशन के लिए यह एक बेहद गंभीर सवाल है, कि आखिर किस कारण से 30 साल व उससे कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ने लगे हैं। दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. अमर सिंघल ने इस बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दी और कम उम्र में बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों के पीछे के कारण के बारे में बताया।
25 से 30 की उम्र में हार्ट अटैक
डॉ. अमर सिंघल के अनुसार पहले हार्ट अटैक को 50 से 60 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 25 से लेकर 30 साल के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बाहर से फिट और एक्टिव दिखने वाले युवा भी अचानक दिल के दौरे का शिकार हो रहे हैं, जिसकी बड़ी वजह आधुनिक जीवनशैली, काम का बढ़ता दबाव और असंतुलित दिनचर्या मानी जा रही है।
नींद की कमी और एनर्जी ड्रिंक
आजकल लोगों को देर रात तक काम करने, पढ़ने या खाली बैठकर फोन चलाने की आदत लग गई है, जिसका सीधा असर नींद के सामान्य चक्र पर पड़ता है। वहीं कुछ लोग तो देर रात तक जागने व एक्टिव रहने के लिए एनर्जी ड्रिंक का ज्यादा सेवन करने लगे हैं, जो एक चिंता का विषय बनता जा रहा है। एनर्जी ड्रिंक में मौजूद अत्यधिक कैफीन और शुगर शरीर को इंस्टेंट एनर्जी तो देती है, लेकिन दिल की धड़कन को तेज कर सकती है और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से एनर्जी ड्रिंक का सेवन कर रहा है या फिर ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करता है तो इससे दिल की धड़कन बिगड़ने लगता है और हार्ट पर जरूरत से ज्यादा लोड बढ़ने लगता है, जिसके परिणाम हार्ट अटैक जैसे हो सकते हैं।
युवाओं में क्यों बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले?
एनर्जी ड्रिंक हो या स्क्रीन देखने की आदत, बढ़ा रही है हाई BP और हार्ट डिजीज
वहीं 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद न लेना भी दिल पर भारी पड़ता है। लगातार कम नींद से शरीर में तनाव हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल असंतुलित हो जाते हैं। देर रात तक स्क्रीन टाइम और अनियमित दिनचर्या युवाओं की नींद की गुणवत्ता को खराब कर रही है, जिसका सीधा नकारात्मक असर दिल की सेहत पर पड़ रहा है।
स्मोकिंग और हार्ट हेल्थ का कनेक्शन
सिगरेट और वेपिंग दोनों ही युवाओं के दिल के लिए गंभीर खतरा हैं। निकोटिन धमनियों को संकुचित कर देता है, जिससे रक्तचाप बढ़ता है और खून का प्रवाह प्रभावित होता है। धीरे-धीरे धमनियों में प्लाक जमने लगता है, जो ब्लॉकेज का कारण बन सकता है और यही स्थिति अचानक हार्ट अटैक में बदल सकती है। कम उम्र में धूम्रपान की आदत भविष्य में गंभीर हृदय रोगों का जोखिम कई गुना बढ़ा देती है।
जंक फूड व बैड लाइफस्टाइल
फास्ट फूड का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और हाई कोलेस्ट्रॉल आज कम उम्र में हार्ट अटैक के बड़े कारण बन चुके हैं। कई युवाओं में साइलेंट हाइपरटेंशन या बढ़ा हुआ ट्राइग्लिसराइड स्तर जैसी समस्याएं होती हैं, जिनका पता अक्सर तब चलता है जब स्थिति गंभीर हो जाती है। पारिवारिक इतिहास भी दिल की बीमारी के खतरे को बढ़ा सकता है।

