UttarakhandRecipe : उत्तराखंड के स्वाद की पहचान है पहाड़ी नमक :- उत्तराखंड के स्वाद की एक खास पहचान है पहाड़ी नमक जिसको दाल-भात, उबली सब्जियों, फल, सलाद, ककड़ी, मूली और चटनी के साथ इस्तेमाल किया जाता है. कई लोग इसे सर्दियों में भोजन के साथ नियमित रूप से लेते हैं, क्योंकि यह पाचन को दुरुस्त रखने में मदद करता है और भूख बढ़ाने वाला माना जाता है. लहसुन और भांग जीरा होने के कारण यह नमक शरीर को गर्म रखने में भी मदद करता है. इस पारंपरिक पहाड़ी नमक को आप अपने घर पर कुछ ही मिनटों में आसानी से तैयार कर सकते हैं. महीनों तक यूज के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।
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पहाड़ी नमक बनाने के लिए ज्यादा सामग्री या किसी मशीन की जरूरत नहीं होती है. इसके लिए सादा मोटा नमक, सूखी हरी मिर्च, लहसुन की सूखी कलियां, ताजा धनिया या भांग जीरा (भांग के बीज), और नींबू का सूखा छिलका लिया जाता है. पहाड़ों में पहले महिलाएं इन सभी सामग्रियों को धूप में अच्छी तरह सुखाकर सिलबट्टे पर पीसती थीं, जिससे इसका स्वाद और खुशबू कई गुना बढ़ जाती थी।
बागेश्वर की रहने वाली रेनू उपाध्याय बताती हैं कि सबसे पहले सिलबट्टे को अच्छी तरह साफ कर लें. अब उसमें मोटा नमक डालकर हल्का कूटें ताकि नमक थोड़ा दरदरा हो जाए. इसके बाद सूखी हरी मिर्च, लहसुन की कलियां और भांग जीरा या धनिया डालें. अंत में नींबू के सूखे छिलके मिलाकर सिल पर धीरे-धीरे रगड़ते हुए पीसें. जब सभी सामग्री आपस में अच्छी तरह मिल जाएं और एक खास सुगंध आने लगे, तो समझ लें कि पहाड़ी नमक तैयार है।
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पहाड़ो के घर घर में ये पहाड़ी नमक दैनिक भोजन जैसे दाल-भात, उबली सब्जियों, फल, सलाद, ककड़ी, मूली और चटनी के साथ किया जाता है. अगर इस नमक क सही तरीके से किसी एयरटाइट डिब्बे में रख दिया जाए, तो यह महीनों तक खराब नहीं होता है. घर आए मेहमान हों या पड़ोसी, एक बार इस पारंपरिक पहाड़ी नमक का स्वाद चख लें, तो इसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाते हैं. बदलते समय में भी यह पहाड़ी रेसिपी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है और अब शहरों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. यही नहीं अब स्थानीय खानपान की दुकानों पर , होटल , रेस्टोरेंट्स में भी उपलब्ध हैं जिसको पर्यटक खरीद कर अपने साथ ले जाते हैं।

