SavinBansal : ऑनलाइन गेमिंग का नशा खतरनाक :- बच्चे ऑनलाइन गेम्स के आदी कैसे हो जाते हैं? बच्चे ज़्यादा कमज़ोर होते हैं क्योंकि उनका दिमाग अभी भी विकसित हो रहा होता है. उनका अपनी भावनाओं पर कम कंट्रोल होता है और उन्हें गेमिंग जैसी मज़ेदार एक्टिविटीज़ को सीमित करने में मुश्किल होती है. इमोशनल कमज़ोरी भी एक भूमिका निभाती है. गेम तुरंत मज़ा और खुशी देते हैं, जिससे सहनशक्ति जल्दी बनती है।
बड़ी ख़बर एक क्लिक में :- तुलसी के पत्तों का पानी पीने के फायदे
फिर बच्चे नुकसान को समझे बिना ज़्यादा घंटे गेम खेलते हैं. पारिवारिक माहौल भी मायने रखता है। कभी-कभी बच्चों को व्यस्त रSavinBansal ऑनलाइन गेमिंग का नशा खतरनाक – डीएमखने के तरीके के तौर पर गेम शुरू किए जाते हैं, या बच्चे तनाव, गुस्सा या सामाजिक मुश्किलों से बचने के लिए गेमिंग का इस्तेमाल करते हैं. ऑनलाइन गेम्स सामाजिक जुड़ाव भी बनाते हैं, जहां बच्चों को लगता है कि वे किसी ग्रुप का हिस्सा हैं। समय के साथ, ये ऑनलाइन पहचान और दोस्ती असली लगने लगती हैं, जिससे उनके आदी होने की संभावना बढ़ जाती है।
बच्चों के डिजिटल व्यवहार की नियमित निगरानी करें – सविन बंसल
अब इसी गंभीर होती घरेलु चुनौती से अभिभावकों को जागरूक और बच्चों को सावधान करने के लिए देहरादून डीएम सविन बंसल ने एक संवेदनशील पहल करते हुए एक बेहद ख़ास स्कूल एडवाइजरी जारी की है। आपको यहाँ बता दे कि बच्चों और किशोरों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत को गंभीर खतरा मानते हुए जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों के लिए विशेष एडवाइजरी में छात्रों के संतुलित डिजिटल उपयोग, सीमित स्क्रीन टाइम और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्कूल प्रबंधन को आदेश दिए हैं कि वे बच्चों के डिजिटल व्यवहार की नियमित निगरानी करें और आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करें। साथ ही, अभिभावकों को जागरूक करने के लिए स्कूल स्तर पर बैठकें और संवाद कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बड़ी ख़बर एक क्लिक में :- खाली पेट पपीता खाने के फायदे
डीएम सविन बंसल ने कहा कि बच्चों की गेमिंग और मोबाइल आदतों पर अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक ऑनलाइन गेमिंग बच्चों को मानसिक तनाव, अवसाद और खतरनाक फैसलों की ओर धकेल सकती है।ऑनलाइन गेमिंग के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता उस समय और गहरा गई जब 4 फरवरी को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां एक रिहायशी इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर तीन सगी बहनों ने आत्महत्या कर ली।
मृतक बहनों की उम्र 12, 14 और 16 वर्ष बताई जा रही है।पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें एक कोरियन ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेमिंग ऐप की लत का शिकार थीं। घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें लिखा था— “मम्मी, पापा, सॉरी।”बताया जा रहा है कि माता-पिता उनकी ऑनलाइन गेमिंग आदतों को लेकर लगातार उन्हें समझाते रहते थे।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों, व्यवहार में बदलाव और मानसिक स्थिति पर नज़र रखें। किसी भी असामान्य संकेत की स्थिति में तुरंत काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।परिवारों को यह समझने की ज़रूरत है कि डिजिटल हेल्थ उतनी ही जरूरी है जितनी फिजिकल और मेंटल हेल्थ. माता-पिता, टीचर और कम्युनिटी को स्क्रीन टाइम, बच्चे किस तरह का कंटेंट देख रहे हैं, और गेमिंग में उनकी कितनी भागीदारी है, इस पर नज़र रखनी चाहिए।

