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khojinarad HIndi News > धामी सरकार के भू कानून को अफसरों का ठेंगा !
उत्तराखण्ड

धामी सरकार के भू कानून को अफसरों का ठेंगा !

भू-अध्यादेश के प्रतिबन्धों का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन !

admin
Last updated: 2025/07/03 at 7:18 AM
admin
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7 Min Read
धामी सरकार के भू कानून को अफसरों का ठेंगा
धामी सरकार के भू कानून को अफसरों का ठेंगा
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Highlights
  • देहरादून सिटी मजिस्ट्रेट को खोजी नारद ने दी जानकारी.
  • सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह का आदेश भी हुआ बेअसर.
  • क्या सीएम और डीएम का आदेश नहीं मनाता दून प्रशासन ?

धामी सरकार के भू कानून को अफसरों का ठेंगा ! :  उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भू कानून को प्रभावी बनाकर ज़मीनों के खेल को रोकने का संकल्प है। राजस्व परिषद और शासन को सभी जमीनों की रिपोर्ट देने और डीएम का पारदर्शी रिपोर्ट बनाने का अभियान का उद्देश्य समझा दिया गया है ताकि सरकार भूमि खरीद-बिक्री पर अधिक नियंत्रण रख सके और अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके लेकिन क्या ऐसा हो रहा है ?

Contents
सब रजिस्ट्रार ने भी नहीं ली सुध ! पढ़िए पूरा शिकायती पत्रखोजी नारद ने उठाया सरकार की साख का मुद्दा ‘सख्त’ भू कानून, क्या सही में है सशक्त ?नए भू कानून के नियम:निकाय क्षेत्र सख्त भू कानून से बाहर

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि लगता है कि सरकारी सिस्टम को अपनी सरकार के आदेशों की न तो परवाह है और न ही कोई अहमियत , तभी तो भू क़ानून को सख्ती से लागू करने के ज़िम्मेदारी को गंभीरता से न लेकर ज़िम्मेदार विभाग इस मिशन को चूना लगा रहा है। न काहू से दोस्ती न काहू से बैर के सिद्धांत पर पत्रकारिता की ज़िम्मेदारी निभाते हुए खोजी नारद प्रदेश सरकार को मौजूदा हालात से रूबरू करा रहा है। ज़मीनों के इस गड़बड़झाले के खेल को समझने के लिए ज़रूरी है की पहले आप देहरादून के रहने वाले अक्षत गुप्ता की इस शिकायती चिट्ठी को ज़रूर पढ़ लीजिये।

यह ख़बर भी पढ़ें :- केला खाने के अचूक फायदे

सब रजिस्ट्रार ने भी नहीं ली सुध ! पढ़िए पूरा शिकायती पत्र

प्रार्थी निवेदन इस प्रकार से है कि श्री मिथलेश कुमार सिंह पुत्र राम अनुठा सिंह हाल निवासी-नयागांव विजयपुर हाथीबडकला दूसरा पता-विजयपुर गोपीवाला अनारवाला देहरादून तीसरा पता-9 एल०आई०सी० कालोनी लोहिया नगर पटना बिहार में सुप्रीटेंड इंजीनियर पी०एच०ई० सर्किल एरिया से निष्कासित है। मिथलेश कुमार सिंह ने अपनी पत्नी श्रीमती मंजू सिह के नाम दिनांक- 7/3/2013 को रकबा 0.0277 है० भूमि सम्पत्ति संख्या-207/4/19 विजयपुर हाथीबडकला देहरादून कय की जो जिल्द संख्या 310 रजिस्टेशन नम्बर-378 पेज 191-214 सब रजिस्टार कार्यालय तृतीय देहरादून के यहां विधिवत दर्ज है, तथा दिनांक-19/11/2010 मिथलेश कुमार सिंह ने अपने नाम से भूमि सम्पत्ति संख्या-209 मिन, 215 मिन रकबा 120 एस ०मी० विजयपुर हाथीबडकला देहरादून जिसका पंजीकरण सब रजिस्टार कार्यालय तृतीय देहरादून के यहां जिलद नम्बर-24 पेज 355-384 दर्ज चला आ रहा हैं।

उत्तराखण्ड भू-अध्यादेश के अनुसार कोई भी उत्तराखण्ड से बाहर का निवासी-उत्तराखण्ड में 250 वर्ग मीटर से अधिक भूमि नहीं ले सकता है परन्तु जिससे भू-अध्यादेश के प्रतिबन्धों का उल्लंघन किया गया है तथा उक्त भूमि बहोने योग्य है। उपरोक्त व्यक्ति जिला देहरादून में कोई भी भूमि कय करता है तो धारा-166/167 के अन्तर्गत राज्य सरकार में निहित की जाए।अतः महोदय से निवेदन है कि उक्त श्रीमती मंजू सिंह के नाम दिनांक-7/3/2013 रकबा 0.0277 है० भूमि सम्पत्ति संख्या-207/4/19 कय की जो – जिल्द संख्या- 310 रजिस्टेशन नम्बर-378 पेज 191-214 सब रजिस्टार कार्यालय तृतीय देहरादून के यहां विधिवत दर्ज भूमि को राज्य सरकार में निहित करने के आदेश पारित कर कानूनी कारवाई करने की कृपा करें।

धामी सरकार के भू कानून को अफसरों का ठेंगा
धामी सरकार के भू कानून को अफसरों का ठेंगा

खोजी नारद ने उठाया सरकार की साख का मुद्दा

अगर कोई जमीन नियम तोड़कर खरीदी-बेची जाएगी तो सरकार उसे अपने कब्जे में ले सकेगी.
उद्योग, होटल, चिकित्सा समेत विभिन्न प्रयोजनों के लिए भी भूमि खरीद सकेंगे.
इसके लिए संबंधित विभागों से भूमि अनिवार्यता प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा.
भू-कानून नगर निगम, नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद, छावनी परिषद क्षेत्र की सीमा में आने वाले और समय-समय पर सम्मिलित किए जा सकने वाले क्षेत्रों को छोड़कर संपूर्ण राज्य में लागू होगा।

उत्तराखंड का कुल क्षेत्रफल 56.72 लाख हेक्टेयर है. इसमें कुल भौगोलिक क्षेत्र का 63.41 फीसदी वन क्षेत्र है और बंजर भूमि के तहत आता है. कृषि योग्य भूमि बेहद कम महज 7.41 लाख हेक्टेयर करीब 14 फीसदी ही है. उत्तराखंड की 2000 में स्थापना के बाद 25 साल हो चुके हैं. उत्तराखंड में एकमात्र भूमि बंदोबस्त 1960 से 1964 के बीच हुआ था, लेकिन पिछले चार-पांच दशकों में कृषि योग्य भूमि का धड़ल्ले से गैर कृषि उद्देश्यों में इस्तेमाल करने की शिकायतें स्थानीय लोग कर रहे हैं.लेकिन सिस्टम में सुधार होता नज़र नहीं आता है।

यह ख़बर भी पढ़ें :- खाली पेट पपीता खाने के फायदे

 ‘सख्त’ भू कानून, क्या सही में है सशक्त ?

नए भू कानून के नियम:

उत्तराखंड में साढ़े 12 एकड़ से अधिक जमीन खरीद की मंजूरी नहीं.
पहाड़ों में चकबंदी और बंदोबस्ती की जाएगी.
बाहरी राज्यों के लोगों के लिए जमीन खरीदना मुश्किल होगा.
डीएम नहीं देंगें जमीनों की खरीदारी की अनुमति
जमीन खरीद के लिए बनेगा पोर्टल. पोर्टल में दर्ज होगा हर एक ब्यौरा.
राजस्व परिषद और शासन को सभी जमीनों की रिपोर्ट दी जाएगी. डीएम तैयार करेंगे रिपोर्ट.
सरकार को भूमि खरीद-बिक्री पर अधिक नियंत्रण प्राप्त होगा, जिससे अनियमितताओं पर रोक लगेगी.
पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि का बेहतर प्रबंधन को बेहतर किया जाएगा.

निकाय क्षेत्र सख्त भू कानून से बाहर

इसके अलावा कहा जा रहा है कि 11 जिलों में जमीनों की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी गई है, लेकिन असल में ऐसा नहीं हुआ है. जानकार  बताते हैं कि, भू कानून की धारा दो स्पष्ट कह रही है कि यह कानून उत्तराखंड के सभी 13 जिलों के निकाय क्षेत्र में प्रभावी नहीं है. नगर निगम, नगर पालिका और नगर निकायों की सीमा में यह कानून लागू नहीं होगा.पूरे प्रदेश में 107 निकाय (नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत) मौजूद हैं. इनमें से उत्तराखंड के दो मैदानी जिले हरिद्वार और उधम सिंह नगर में केवल 33 निकाय हैं बाकी 73 निकाय पहाड़ों पर हैं. इसमें श्रीनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी जैसे बड़े और महत्वपूर्ण शहर भी शामिल हैं. ऐसे में यहां पर जमीनों की खरीद फरोख्त को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है।

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