BanshidharTiwari : बीच चौराहा अचानक पेड़ लगाने लगे VC MDDA बंशीधर तिवारी ! :- अपनी सरल और व्यावहारिक कार्यशैली से उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी में खास पहचान रखने वाले प्रभावशाली आईएएस वीसी एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने एक बार फिर लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। दरअसल रोजाना की तरह कार्यालय जाते समय अचानक एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की नजर देहरादून की एक सड़क के डिवाइडरों पर चल रहे पौधरोपण कार्य पर पड़ी।
उन्होंने तुरंत वाहन रुकवाकर मौके पर पहुंचकर पौधरोपण एवं रखरखाव कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पौधों की गुणवत्ता, नियमित सिंचाई, सुरक्षा और संरक्षण की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा कर्मचारियों के साथ स्वयं पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लगाए गए प्रत्येक पौधे की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए, क्योंकि किसी भी पौधरोपण अभियान की सफलता पौधों के संरक्षण और उनके वृक्ष बनने में निहित है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए ने इस वर्ष एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसके अंतर्गत शहर के प्रमुख मार्गों, सड़क डिवाइडरों, पार्कों, सार्वजनिक स्थलों एवं अन्य उपयुक्त स्थानों पर बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं बल्कि देहरादून को स्थायी रूप से अधिक हरित, स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है।
देहरादून तेजी से संवर रहा है
स्मार्ट सिटी देहरादून में क्लीन और ग्रीन सड़कें चौड़े चौराहे और खूबसूरत हरे भरे डिवाइडर की सौगात दे रहे एमडीडीए की नई योजनाएं आकार ले रही हैं और शहर का विस्तार हो रहा है। शाइनिंग समाचार को जानकारी देते हुए वीसी बंशीधर तिवारी का कहना है कि विकास की इस रफ्तार के बीच शहर की हरियाली को बचाना और बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है।
इसीलिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हरित उत्तराखंड के विजन को धरातल पर उतारते हुए एमडीडीए ने एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। अच्छी बात यह है कि अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि उनके संरक्षण, सिंचाई और नियमित देखभाल पर भी जोर दिया जा रहा है।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का कर्मचारियों के बीच बैठकर पौधों की देखभाल में हाथ बंटाना एक संदेश भी है, नेतृत्व वह नहीं जो केवल लक्ष्य तय करे, नेतृत्व वह है जो रास्ते में रुककर यह भी देखे कि लक्ष्य जमीन पर कितना हरा हो रहा है।
उम्मीद है, यह मुहिम तस्वीरों और आंकड़ों से आगे बढ़कर आने वाले वर्षों में देहरादून को सचमुच एक स्वच्छ, सुंदर और हरा-भरा शहर बनाएगी।क्योंकि शहर सिर्फ कंक्रीट से नहीं बनते…शहर सांस लेते हैं, और उनकी सांसें पेड़ों से चलती हैं।

