MansarovarYatra : Kailash Mansarovar मानसरोवर की यात्रा :- कैलाश पर्वत समुद्र की सतह से 22068 फुट ऊंचा है और यह चीन में आता है। कैलाश पर्वत मानसरोवर झील से घिरे होने के कारण इसकी धार्मिक महत्ता बढ़ जाती है। मानसरोवर का नाम सुनकर हर किसी के मन में वहां जाने की इच्छा जागृत होती है। मानसरोवर के पास ही एक सुंदर सरोवर रकस ताल भी स्थित है जो वहां की सुंदरता को चार चांद लगाता है। रकस ताल सरोवर और कैलाश मानसरोवर के उत्तर दिशा में कैलाश पर्वत स्थित है जिसके दक्षिण दिशा में गुरला शिखर और गुरला पर्वतमाला भी है ।
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पवित्र कैलाश पर्वत से कई महत्वपूर्ण नदियां निकलती है जैसे- ब्रह्मपुत्र, सतलुज और सिंधु नदी। भगवान ऋषभदेव पौराणिक कथाओं के अनुसार यही निर्वाण प्राप्त किया था। श्री भरतेश्वर स्वामी मंगलेश्वर स्वामी जिसके नाम से इस देश का नाम भारत पड़ा ऐसे ऋषभदेव भगवान के पुत्र भरत ने इस पर विजय प्राप्त की थी। पांडवों के दिग्विजय प्रयास के समय अर्जुन ने इस पर विजय प्राप्त किया था। इसके अलावा यहां अनेक ऋषि मुनि के निवास का उल्लेख किया गया है।
यह चार धर्मों- हिंदू, सिक्ख, जैन, और बौद्ध धर्म का धार्मिक केंद्र माना जाता है। मानसरोवर के पास एक कुबेर नगरी है जहां से विष्णु भगवान के कर कमलों से गंगा निकल कर कैलाश पर्वत की चोटी पर गिरती है।यहां से भगवान शिव अपनी जटाओं में भरकर धरती पर निर्मल धारा के रूप में प्रवाहित करते हैं। मानसरोवर पहाड़ों से घिरा हुआ है जिसको पुराणों में छीर सागर के नाम से भी जाना जाता है। यही क्षीरसागर भगवान विष्णु का स्थाई निवास भी माना जाता है।
जैन धर्म में भी कैलाश पर्वत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी पर्वत पर श्री भरत स्वामी ने रत्नों के 72 जिनालय का निर्माण करवाया था। तिब्बत में भी कैलाश मानसरोवर की 13 परिक्रमा को महत्वपूर्ण बताते हैं और यह भी बताया जाता है कि यहां दंड प्रणिपात करने से एक जन्म का एवं 10 परिक्रमा करने से एक कल्प का पाप नष्ट हो जाता है तथा जो 108 परिक्रमा करते हैं उनको जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है।
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बौद्ध धर्म का मानना है कि इसके केंद्र में एक वृक्ष है जिसके फलों के औषधीय गुणों से सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक बीमारियों का उपचार करके ठीक किया जा सकता है। इसे बौद्ध भगवान का निवास स्थान भी कहा जाता है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के अनुसार इस स्थान पर आकर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और यह भी कहा जाता है कि भगवान बुद्ध की माता ने भी यहां की यात्रा की थी।
मानसरोवर चीन में होने के कारण चीन जब चाहे भारतीय तीर्थ यात्रियों को वहां जाने से रोक सकता है या यात्रा को बीच में ही बाधित कर सकता है। कैलाश मानसरोवर जाने के लिए दो रास्ते हैं एक नेपाल के रास्ते और दूसरा सिक्किम के रास्ते लेकिन दोनों में से किसी भी रास्ते से आप जाएंगे तो आपको चीन का बॉर्डर पार करना ही पड़ेगा। बहुत से लोगों को लगता है कि कैलाश मानसरोवर भारत में स्थित है लेकिन ऐसा नहीं है मानसरोवर चीन में स्थित है।
कैलाश मानसरोवर जाने के लिए आपको सरहद पार करने के बाद 5 दिन की यात्रा करने पर आप दारचेन (Darchen) बेस कैंप पहुंचेंगे वहां से आपको 3 दिन का समय कैलाश मानसरोवर की परिक्रमा करने में लग जाएंगे।कैलाश मानसरोवर से वापस जाने में भी आपको 5 दिन लग जाएंगे अगर चीन बीच में यात्रा को बाधित नहीं करता है तो। क्योंकि यह सामान्य कानून है कि आप जिस देश में रहेंगे आपको उस देश के कानून का पालन करना होगा। कैलाश मानसरोवर की यात्रा बहुत ही कठिन होती है इसमें बर्फीले रास्तों पर चलना पड़ता है।

