इस बीच भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का सम्मान मिला।
भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बना।
आर्थिक मामले में मोदी सरकार की कामयाबी की मुख्य बातें:
2021 में ग्लोबल रीयल टाइम डिजिटल पेमेंट का 40% हिस्सा भारत का।
कोविड के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए 27.1 लाख करोड़ रुपए का आत्मनिर्भर भारत
पैकेज।
अक्टूबर 2021 में सेवा पीएमआई दस साल के उच्च स्तर 58.4 पर पहुंच गया।
अप्रैल 2022 में 1.68 लाख करोड़ रुपए के साथ मासिक जीएसटी संग्रह अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर।
वित्त वर्ष 2022 में गुड्स और सर्विसेज एक्सपोर्ट रिकॉर्ड 676.5 बिलियन डॉलर।
ECLGS के तहत MSMEs के लिए 3.63 लाख करोड़ रुपए से अधिक स्वीकृत।
अगले 5 वषों में 60 लाख अतिरिक्त रोजगार पैदा करने के लिए पीएलआई योजनाएं।
2021-22 में 5.5 बिलियन डॉलर के मोबाइल निर्यात किए गए।
6.60 लाख करोड़ रुपए से अधिक के फंसे कर्ज की वसूली।
वित्त वर्ष 2021-22 में 84.8 बिलियन डॉलर का अब तक का सबसे अधिक वार्षिक एफडीआई इनफ्लो।
मोदी सरकार की उपलब्धियां:
विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था। दुनियाभर में इस बात को लेकर सहमति है कि भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहेगी।
उच्च विकास से सरकार के पास बड़ी मात्रा में संसाधन उपलब्ध होंगे, इनसे कल्याणकारी और ढांचागत
योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
उच्च विकास से नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नए अवसरों से आय में निरंतर वृद्धि होगी और ग्रोथ के फायदे समाज के हर वर्ग को मिलेंगे।
विपदा को अवसर में बदलता आत्मनिर्भर भारत। महामारी के प्रारंभ से ही प्रधानमंत्री मोदी के ठोस आर्थिक प्रबंधन ने आपदा को अवसर में बदल दिया।
सभी आर्थिक संकेतक भारत के आर्थिक पुनरुत्थान की ओर इशारा कर रहे हैं।
एमएसएमईएस से एमएनसीएस तक सभी कंपनियों के उत्पादन में विस्तार हो रहा है। इसने सेवाएं, उत्पादन और निर्यात सेक्टर में ऐतिहासिक योगदान दिया है।
पीएम मोदी ने कठिन समय में व्यक्तिगत रूप से संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाते हुए दृढ़ विश्वास और आम सहमति से सुधारों की एक नई प्रवृत्ति शुरू की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस कठिन दौर में भी कई संरचनात्मक सुधार के लिए राजनीति को आड़े नहीं आने दिया।
सहकारी संघवाद का मतलब है केन्द्र का राज्यों को स्वेच्छा से सुधार के लिए प्रोत्साहित करना।
सुधारों ने सभी स्टेकहोल्डर्स के हितों को सुरक्षित किया।
सरकार की सख्त कार्रवाई से एनपीएएस और आर्थिक अपराधों में तेजी से कमी आई।
आईबीसी ने भारतीय बैंकिंग और कॉरपोरेट क्षेत्रों को मुश्किलों से उबारा।
भारत तेजी से ‘डिजिटल अर्थव्यवस्था’ में बदल रहा है।

