सूडान में एक भारतीय अल्बर्ट अगस्तिन की दुर्भाग्यपूर्ण मौत को छोड़कर भारतीय हवाई सेना तथा भारतीय जल सेना ने डिप्लोमैटिक कॉप्र्स के संयुक्त प्रयास से एक बार फिर उजागर किया है कि भारत ने संकट में अपने तथा दूसरे देशों के लोगों को बचाने के लिए किए प्रयासों में मोहरी बनने तक एक लंबा सफर तय किया है।
यह एक सूझवान तथा दूरंदेशी सोच वाली लीडरशिप के कारण संभव हुआ है जो उचित फैसला लेने में समय नहीं व्यर्थ करती तथा मुसीबत वाले क्षेत्र में सही निर्णय लेने में अग्रणी रहती है।
इसके अलावा 2016 में दक्षिणी सूडान में किया गया ‘ऑप्रेशन संकटमोचन’ अफ्रीकी देश में भारतीय बचाव मिशन के लिए मिसाल बना रहा।
कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में ‘ऑप्रेशन समुंदर सेतु’ में भी 3992 भारतीयों को घर वापस लाया गया था।
अब तक यह अच्छी तरह प्रत्यक्ष हो चुका है कि किसी भी दुविधा में भारतीय आखिरी नहीं बल्कि बचाए जाने वाले पहले व्यक्ति होंगे तथा दुनिया ने भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती ताकत को स्वीकार किया है।
भारतीय फलसफे के अनुसार पूरा विश्व एक ही स्थान है।
इसके अनुसार भारतीय बचाव के प्रयास में राष्ट्रीयता में मतभेद नहीं करते। इस बात को फ्रांस के राष्ट्रपति मैनुअल मैक्रोन ने स्वीकार किया।
जिन्होंने सूडान की राजधानी खारतूम से फ्रांसीसी दूतावास के कर्मचारियों को बचाने तथा निकालने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया।
हाल ही में भारत ने यूक्रेन में सबसे बड़े बचाव तथा निकासी मिशन ‘ऑप्रेशन गंगा’ को अंजाम दिया। यूक्रेन में फंसे हजारों भारतीय विद्यार्थियों को युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला गया था।
भारत के मौजूदा मंत्रियों ने यूक्रेन की सीमा के साथ लगते देशों की राजधानी में डेरे लगाए।
जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी लीडरशिप के साथ मिलकर काम किया, ताकि भारतीय विद्यार्थियों को सुरक्षित क्षेत्रों में जाने की इजाजत देने हेतु सीमित घंटों के लिए युद्ध को भी रोका जा सके।
भारत अन्य देशों के बहुत सारे लोगों को निकालने तथा बचाने में भी कामयाब रहा।
भारत ने 2015 में ‘ऑप्रेशन राहत’ के हिस्से के रूप में यमन से बड़े स्तर पर निकासी अभ्यास किया था।
जिसमें 6710 व्यक्तियों, जिनमें 4748 भारतीय तथा 1962 विदेशी नागरिक शामिल थे, को बाहर निकाला गया था।
भारतीय बचाओ मिशन’ अब उन पर बनी फिल्मों तथा वैब सीरीज के साथ घरेलू नाम बन गए हैं जो कि पहले सिर्फ अमरीकी फिल्मों में देखा जाता था।
केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया के किसी भी हिस्से में संकट को हल करने में प्रधानमंत्री मोदी की निजी भागीदारी को याद करते हुए बताया कि वह बहुत हैरान हुए जब उन्होंने काबुल में भारतीय दूतावास पर आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले के बाद बचाव कार्यों के बारे में पूछने के लिए आधी रात के बाद प्रधानमंत्री मोदी को अपने मोबाइल पर फोन करते देखा।
काबुल में तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद ‘ऑप्रेशन देवी शक्ति’ ने अफगानिस्तान से भारतीय नागरिकों तथा विदेशी नागरिकों को बाहर निकाला।
तुर्की में भूकंप के झटकों के कुछ घंटों के भीतर प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही एमरजैंसी मीटिंग की थी।
पिछले कुछ दशकों में दुनिया के किसी भी हिस्से में आई सबसे बड़ी त्रासदी का जवाब देने के लिए नैशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स की विशेष टीमें हवाई जहाज के माध्यम से संबंधित क्षेत्र में पहुंचने के लिए हर समय तत्पर रहती हैं।
डाक्टर, पैरामैडिक तथा अन्य एन.डी.आर.एफ. कर्मचारियों की टीम, जिन्होंने ‘ऑप्रेशन दोस्त’ के हिस्से के रूप में राहत कार्य किए, ने कई जानें बचाकर तुर्की के लोगों का दिल जीत लिया।
भारत की ऐसी महारत 2015 में नेपाल में आए भूकंप के मद्देनजर भी देखने को मिली, जो भयंकर तबाही लाया था।
कीमती जानें बचाने के लिए ‘ऑप्रेशन मैत्री’ के साथ भारत की बचाव संबंधी कार्रवाई समय पर थी।
भारत की ओर से कुदरती आपदा के समय में तुरंत कार्रवाई करके हजारों जानें बचाई गईं, जो कि भुज भूकंप तथा उत्तराखंड में बाढ़ के दौरान देखने को भी मिला।
यह सब कुछ प्रधानमंत्री मोदी की ओर से राजनीतिक पूंजी के बड़े निवेश के साथ ही संभव हुआ।

