NainaDeviTemple : झीलों के शहर में जहां हर लहर में बसती है आस्था :- जहां पहाड़ों की गोद में छिपी है एक ऐसी शक्ति… जो सदियों से भक्तों की हर मुराद पूरी करती आई है… हम बात कर रहे हैं नयना देवी मंदिर की… जो सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि विश्वास और इतिहास का संगम है।”
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नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र में स्थित नयना देवी मंदिर आज देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। खासतौर पर नवरात्र के दौरान यहां भक्ति का ऐसा सैलाब उमड़ता है, जो इस मंदिर की महिमा को और भी खास बना देता है।
मान्यता है कि यह मंदिर शक्तिपीठ है… जहां मां सती के नयन गिरे थे। यही कारण है कि इसे “नयना देवी” के नाम से जाना जाता है।
लेकिन इस मंदिर की कहानी सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है… इसका इतिहास भी उतना ही रोचक है। उन्नीसवीं शताब्दी में स्थानीय व्यापारी मोती लाल साह ने झील किनारे इस मंदिर का निर्माण कराया था। लेकिन 1880 में आए भयंकर भूस्खलन ने इस मंदिर को पूरी तरह तबाह कर दिया।
कहानी में मोड़ तब आया… जब मोती लाल साह के पुत्र अमरनाथ साह को मां ने स्वप्न में दर्शन दिए और मूर्ति का स्थान बताया। इसके बाद 1883 में वर्तमान स्थान पर मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया।
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तब से लेकर आज तक… यह मंदिर लगातार श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के दौरान यहां कन्या पूजन, नारियल चढ़ावा और विशेष अनुष्ठानों का आयोजन होता है। अष्टमी और नवमी के दिन तो यहां श्रद्धालुओं की भीड़ अपने चरम पर पहुंच जाती है।
नौ दिनों तक चलने वाले इन अनुष्ठानों के बाद एकादशी के दिन भव्य डोला यात्रा निकाली जाती है, जिसमें मां की मूर्तियों को पूरे शहर में भ्रमण कराया जाता है और फिर झील के दूसरे किनारे विसर्जित किया जाता है। आज मंदिर को मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत और भी भव्य रूप दिया जा रहा है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
हर साल लाखों भक्त यहां पहुंचते हैं… और यही विश्वास लेकर लौटते हैं कि मां ने उनकी प्रार्थना जरूर सुनी है। “इतिहास की परतों में छिपी आस्था… और आस्था में बसती अनगिनत उम्मीदें… नयना देवी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं… बल्कि वो जगह है जहां विश्वास, चमत्कार बन जाता है।

