NASASpaceTech : स्पेस में कैसे ‘नेचर कॉल’ हैंडल करते हैं एस्ट्रोनॉट्स ? :- नासा का आर्टेमिस मिशन II चंद्रमा के लिए उड़ान भर चुका है. हालांकि ओरियन स्पेसक्राफ्ट के टॉयलेट सिस्टम में शुरुआत में ही दिक्कत आ गई जिसे बाद में इंजीनियरों ने ठीक कर दिया. मिशन कंट्रोल ने अंतरिक्ष यात्रियों को सलाह दी कि सिस्टम को पूरी तरह ठीक होने के बाद ही इस्तेमाल करें, ताकि कोई समस्या न हो. इस मिशन में इस्तेमाल किया जा रहा यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम (UWMS) अंतरिक्ष में स्वच्छता तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 30 मिलियन डॉलर (22.6 मिलियन पाउंड) यानी भारतीय रुपयों में ₹2,78,21,98,500 की लागत से विकसित इस सिस्टम को खासतौर पर अंतरिक्ष यात्रियों की पुरानी शिकायतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. इसका उद्देश्य कम जगह में बेहतर, सुरक्षित और अधिक आरामदायक सुविधा देना है।
अपोलो मिशन के दौरान स्थिति काफी अलग थी. एस्ट्रोनॉट्स को पेशाब के लिए स्पेससूट के अंदर कंडोम जैसे विशेष उपकरण (मिशन के सारे एस्ट्रोनॉट्स पुरुष थे) का इस्तेमाल करना पड़ता था, जबकि ठोस अपशिष्ट को एक विशेष बैग में इकट्ठा किया जाता था जिसे शरीर से चिपकाया जाता था. इस प्रक्रिया में कई बार रिसाव जैसी समस्याएं भी सामने आईं और यह अनुभव अंतरिक्ष यात्रियों के लिए काफी असुविधाजनक था।
नई तकनीक में ओरियन स्पेसक्राफ्ट में पहली बार एक छोटा लेकिन प्राइवेट टॉयलेट कंपार्टमेंट दिया गया है. इसमें हैंडरेल और फुट सपोर्ट दिए गए हैं ताकि माइक्रोग्रैविटी में तैरते हुए भी एस्ट्रोनॉट्स सुरक्षित तरीके से इसका इस्तेमाल कर सकें. कनाडा के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हानसेन ने इस सुविधा को एक बड़ी राहत बताया है क्योंकि छोटे अंतरिक्ष यान में प्राइवेसी मिलना अपने आप में खास बात है।
इस टॉयलेट सिस्टम में तरल अपशिष्ट के लिए एक फनल और पाइप का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि ठोस अपशिष्ट को वैक्यूम सिस्टम के जरिए एक बैग में खींचकर सुरक्षित कंटेनर में जमा किया जाता है. यह प्रक्रिया काफी तेज और प्रभावी होती है, लेकिन इसमें आवाज भी होती है इसलिए अंदर इन्सुलेशन लगाया जाता है और कभी-कभी अंतरिक्ष यात्रियों को कानों की सुरक्षा के लिए उपकरण पहनने पड़ते हैं।

