By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
  • उत्तराखण्ड
    • देहरादून
    • रुड़की
    • चमोली
    • रुद्रप्रयाग
    • टिहरी गढ़वाल
    • पौड़ी गढ़वाल
    • उत्तरकाशी
    • अल्मोड़ा
    • उधम सिंह नगर
    • चम्पावत
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • बागेश्वर
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्ली
    • पंजाब
    • महाराष्ट्र
  • अंतराष्ट्रीय
  • तत्काल प्रभाव
  • खोजी नारद कहिंन
  • तत्काल प्रभाव
  • More
    • बकैती
    • भांडा फोड़
    • लफ्फाज़ी
    • वीडियो
Reading: HistoryOfGlasses : जब चश्मा नहीं था, तब लोग कैसे देखते थे ?
Share
Notification Show More
Aa
khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
Aa
Search
  • उत्तराखण्ड
  • खोजी नारद कहिंन
  • तत्काल प्रभाव
  • इंटरव्यू
  • बकैती
  • भांडा फोड़
  • लफ्फाज़ी
  • वीडियो
Follow US
  • Advertise
© 2024 Khoji narad. All Rights Reserved.
khojinarad HIndi News > खोजी नारद कहिंन > HistoryOfGlasses : जब चश्मा नहीं था, तब लोग कैसे देखते थे ?
तत्काल प्रभाव

HistoryOfGlasses : जब चश्मा नहीं था, तब लोग कैसे देखते थे ?

छोटे छेद से देखते थे दुनिया.

admin
Last updated: 2026/08/03 at 10:42 AM
admin
Share
3 Min Read
HistoryOfGlasses
HistoryOfGlasses : जब चश्मा नहीं था, तब लोग कैसे देखते थे ?
SHARE
Highlights
  • पानी और कांच का सहारा.
  • पढ़ने का तरीका बदल लेते थे.
  • 'रीडिंग स्टोन' ने बदली तस्वीर.

HistoryOfGlasses : जब चश्मा नहीं था, तब लोग कैसे देखते थे ? :-  आज अगर किसी की नजर कमजोर हो जाए, चश्मा उसका सहारा बनता है। कुछ लोग कॉन्टैक्ट लेंस लगवा लेते हैं, तो कुछ लेजर सर्जरी करा लेते हैं। वैसे क्या आपने कभी सोचा है कि सैकड़ों साल पहले, जब चश्मा ही नहीं था, तब लोग धुंधली नजर के साथ कैसे जीते थे? यहां हम इसी सवाल का जवाब दे रहे हैं:

Contents
छोटे छेद से देखते थे दुनियापानी और कांच का सहारापढ़ने का तरीका बदल लेते थे‘रीडिंग स्टोन’ ने बदली तस्वीर

इंसान की नजर कमजोर होना कोई नई समस्या नहीं है। इतिहास बताता है कि प्राचीन सभ्यताओं के लोग भी उम्र बढ़ने के साथ धुंधला देखने लगते थे। फर्क सिर्फ इतना था कि उस समय आधुनिक ऑप्टिकल तकनीक मौजूद नहीं थी। इसलिए लोगों ने अपने अनुभव और उपलब्ध संसाधनों से कई दिलचस्प उपाय खोज निकाले थे।

छोटे छेद से देखते थे दुनिया

पुराने समय में कुछ लोग एक पतली धातु या लकड़ी की पट्टी में छोटा-सा छेद बनाकर उसके आर-पार देखने की कोशिश करते थे। इसे ही आज पिनहोल इफेक्ट कहा जाता है। छोटे छेद से देखने पर आंख में कम बिखरी हुई रोशनी प्रवेश करती है, जिससे धुंधली चीजें कुछ हद तक साफ दिखाई देने लगती हैं। यह तरीका इलाज नहीं था, लेकिन अस्थायी राहत जरूर देता था।

पानी और कांच का सहारा

इतिहासकारों के अनुसार, रोमन दार्शनिक सेनेका के बारे में कहा जाता है कि वे पानी से भरे कांच के पात्र के जरिए अक्षरों को बड़ा करके पढ़ते थे। इसी तरह कुछ लोग पारदर्शी क्रिस्टल या चमकदार कांच के टुकड़ों का इस्तेमाल भी करते थे। इन्ही चीजों ने आगे चलकर मैग्निफाइंग ग्लास और फिर चश्मे के विकास की राह खोली।

पढ़ने का तरीका बदल लेते थे

जब नजर कमजोर होने लगती थी, तो लोग पढ़ने-लिखने का तरीका भी बदल देते थे। कोई किताब को आंखों के बहुत करीब लाता, तो कोई उसे दूर करके देखने की कोशिश करता। कई लोग तेज धूप या दीपक की ज्यादा रोशनी में पढ़ते थे, ताकि अक्षर स्पष्ट दिखाई दें।

‘रीडिंग स्टोन’ ने बदली तस्वीर

11वीं और 12वीं शताब्दी में यूरोप में रीडिंग स्टोन का इस्तेमाल शुरू हुआ। यह एक गोल या अर्धगोलाकार पारदर्शी कांच का टुकड़ा होता था, जिसे लिखे हुए शब्दों के ऊपर रखा जाता था। इससे अक्षर बड़े दिखाई देते थे और पढ़ना आसान हो जाता था। इसे आधुनिक चश्मे का शुरुआती रूप माना जाता है।

You Might Also Like

DehradunTransport : देहरादून में सुधरेगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

ParentsPropertyRights : मां-बाप की संपत्ति पर जन्मजात हक नहीं  

GmailRecovery : सेल्फी वीडियो से जीमेल अकाउंट करें रिकवर

LungCancer : क्या ई-सिगरेट बढ़ा रही है फेफड़ों के कैंसर का खतरा ?

CyberFraudRefund : साइबर फ्रॉड में कैसे वापस पाएं डूबा पैसा ?

TAGGED: #AncientInventions, #AncientTechnology, #DidYouKnow, #EyeCareAlert, #EyeHealthHistory, #GlassesHistory, #HistoryFacts, #HistoryOfGlasses, #HowPeopleSawBeforeGlasses, #HumanHistory, #InterestingFacts, #khojinaradbreakingnews, #OpticalHistory, #PinholeEffect, #ReadingStone, #ScienceFacts, khojinarad

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.
[mc4wp_form]
By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
admin August 3, 2026 August 3, 2026
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article UttarakhandCyberAttack UttarakhandCyberAttack : उत्तराखंड सरकार की 10 वेबसाइटों पर साइबर अटैक
Next Article WrongRecharge WrongRecharge : गलत नंबर पर हो गया रिचार्ज? घबराएं नहीं

Advt.

Advt.

https://khojinarad.com/wp-content/uploads/2025/10/Vertical-V1-MDDA-Housing-1.mp4

Advt.

https://khojinarad.com/wp-content/uploads/2025/10/MDDA-Final-Vertical-2-1.mp4

Latest News

DehradunTransport
DehradunTransport : देहरादून में सुधरेगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था
उत्तराखण्ड August 3, 2026
ParentsPropertyRights
ParentsPropertyRights : मां-बाप की संपत्ति पर जन्मजात हक नहीं  
खोजी नारद कहिंन August 3, 2026
GmailRecovery
GmailRecovery : सेल्फी वीडियो से जीमेल अकाउंट करें रिकवर
राष्ट्रीय August 3, 2026
LungCancer
LungCancer : क्या ई-सिगरेट बढ़ा रही है फेफड़ों के कैंसर का खतरा ?
खोजी नारद ब्रेकिंग न्यूज़ August 3, 2026
//

Khoji Narad is a Uttarakhand-based news website that delivers comprehensive coverage of national and international news. With a focus on accurate, timely, and in-depth reporting, Khoji Narad offers insights into politics, business, culture, and more, while also highlighting the unique stories from the heart of Uttarakhand.

Quick Link

  • इंटरव्यू
  • खोजी नारद कहिंन
  • बकैती
  • भांडा फोड़
  • लफ्फाज़ी
  • वीडियो

Top Categories

  • उत्तराखण्ड
  • अंतराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • महाराष्ट्र

Contact

Smriti Sahgal (Editor)
Address: 207/4, Vijaypur, Gopiwala, Anarwala Dehradun-248001, Uttarakhand
Phone: 9837663626
Email: indiankhojinarad@gmail.com

 

khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
Follow US
© 2024 Khoji Narad. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Register Lost your password?