HolikaDahan : आस्था की आग, साहस की राह: सरस गाँव में होली का अनोखा उत्सव :- नमस्कार, आप देख रहे हैं खोजी नारद देशभर में होली का त्यौहार रंगों, ढोल-नगाड़ों और मिठाईयों के साथ धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन Surat के अलपाड तालुका के सरस गाँव में होली के अवसर पर एक अनोखी परम्परा देखने को मिलती है।
यहाँ होलिका दहन के बाद न केवल बच्चे बल्कि गाँव के बड़े-बुजुर्ग भी धधकते हुए अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं, जो आस्था, साहस और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परम्परा कोई दो-चार वर्ष पुरानी नहीं है, बल्कि करीब अस्सी साल पुरानी है। कोविड महामारी के दौरान जब पूरे देश में त्यौहार और मेलजोल पर पाबंदी लगी थी, तब भी सरस गाँव के लोग अपनी इस अनोखी परम्परा को बनाए रखने में जुटे रहे। यह उनके सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वास की गहराई को दर्शाता है।
गाँववासी अग्नि को देवता के रूप में मानते हैं। साल में केवल एक बार होली पर ही वे धधकते अंगारों पर चलने की परम्परा निभाते हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि इस प्रथा का पालन करने से व्यक्ति के शरीर और मन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके अलावा, गाँव के लोग मानते हैं कि जो भी कोई मान्यता वे मानते हैं, वह इस अनुष्ठान के माध्यम से पूर्ण हो जाती है।सिर्फ सरस गाँव ही नहीं, बल्कि Surat के आसपास के अन्य गाँवों में भी होली के दिन इस तरह की प्रथा का पालन किया जाता है।
हर उम्र के लोग इस परम्परा में भाग लेने के लिए उत्साहित रहते हैं और इसे श्रद्धा, विश्वास और साहस का प्रतीक मानते हैं। आस्था और विश्वास से भरे हुए गाँववासी बिना किसी हानि के इस जोखिम भरे अनुष्ठान को निभाते हैं, जो उनके समाज में एकता और सामूहिक विश्वास की भावना को भी दर्शाता है।
जैसे ही होलिका की राख धधक उठती है, गाँव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग एकजुट होकर इस परम्परा को निभाते हैं। यह दृश्य केवल होली के रंग और खुशियों का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह साहस, विश्वास और सांस्कृतिक धरोहर की मिसाल भी है।
इस अनोखी परम्परा के माध्यम से सरस गाँव हर साल यह संदेश देता है कि आस्था जितनी गहरी, उत्सव उतना अनोखा।

