DharaliVillage : क्या आप जानते हैं धराली गांव का इतिहास ? :- धराली गांव उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में समुद्र तल से करीब 8 हजार फीट की ऊंचाई पर भागीरथी नदी के किनारे हर्षिल घाटी के पास बसा हुआ है और गंगोत्री के बीच एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सेब के बागानों और राजमा की खेती के लिए प्रसिद्ध है. धराली को गंगोत्री यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए एक शांत और आकर्षक ठहराव स्थल माना जाता है।
ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है क्योंकि यह गंगोत्री मंदिर के रास्ते में पड़ता है जो हिंदुओं के लिए पवित्र चारधाम यात्रा का हिस्सा है. स्थानीय लोककथाओं और परंपराओं के अनुसार यह क्षेत्र लंबे समय से स्थानीय गढ़वाली समुदाय का निवास स्थान रहा है. यह गांव अपनी शांत वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है।
प्राचीन मंदिर का इतिहास
धराली गांव में वैसे तो कई प्रसिद्ध मंदिर हैं लेकिन इसमें कल्प केदार मंदिर का सबसे ज्यादा महत्व है जो इस बाढ़ में बुरी तरह नष्ट हो गया. कहते हैं कि इस मंदिर का वास्तु शिल्प केदारनाथ धाम से मिलता जुलता है जिसके कारण इसका नाम कल्प केदार पड़ा. लोगों का कहना है कि यह मंदिर वर्षों किसी आपदा की वजह से जमीन में दबा था. 1945 में खीर गंगा के इस नाल का बहाव कुछ कम हुआ तो लोगों को इस मंदिर का शिखर दिखा. जिसके बाद 20 फीट खुदाई की गई और ये पूरा शिव मंदिर सामने आया जिसकी बनावट काफी प्राचीन थी।
खीर गंगा श्रीकंठ पर्वत शिखर से निकलती है. दरअसल, गोमुख से निकलने वाली गंगा (भागीरथी) नदी में कई छोटी-बड़ी सहायक नदियां मिलती हैं. धराली के पास भागीरथी नदी में खीर गंगा आकर मिलती है. यह दिखने में तो शांत सी है. मगर इसका इतिहास काफी रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
कहा जाता है कि कभी धराली में 240 मंदिरों का समूह हुआ करता था. ये मंदिर कत्यूरी शैली में बने हुए थे. इन मंदिरों का उल्लेख वर्ष 1816 में गंगा भागीरथी के उद्गम की खोज में निकले अंग्रेज यात्री जेम्स विलियम फ्रेजर ने भी अपने यात्रा वृत्तांत में किया है. 19वीं सदी की शुरुआत में खीरगंगा नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण ये मंदिर मलबे में दब गए और हमेशा के लिए मिट्टी में समा गए. इस बाढ़ ने पूरे क्षेत्र को तबाह कर दिया था।
इसके बाद वर्ष 2013 में जब भागीरथी नदी में विनाशकारी बाढ़ आई, तब भी खीरगंगा नदी में बाढ़ आई थी. फिर साल 2018 के अगस्त महीने में रात करीब दस बजे खीर गंगा में उफान के साथ भारी मलबा आया था. इससे गंगोत्री हाईवे पर बनी पुलिया चोक होने के बाद ऊपरी हिस्से में मलबे का जमाव बढ़ता चला गया. नदी के पानी के साथ आया मलबा यहां बाढ़ सुरक्षा दीवार को फांद कर 50 से अधिक होटल एवं घरों में जा घुसा था. प्राचीन कल्प केदार मंदिर का आधा हिस्सा मलबे में दब गया. साथ ही आपदा में नदी से लगे सेब के बागीचों को भारी नुकसान पहुंचा था।

