देशभर के छात्र और शिक्षक इन दिनों गुस्से में हैं। वजह है SSC चयन पोस्ट फेज़ तेरह भर्ती परीक्षा में हुई कथित गडबडीयां। दिल्ली से लेकर बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र तक, हज़ारों छात्र सडकों पर उतर आए हैं और पारदर्शिता व जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। दिल्ली में, बडी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग D O P T के बाहर प्रदर्शन किया। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब जंतर मंतर इलाके में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच झडप हो गई, जिसके बाद कई छात्रों को हिरासत में ले लिया गया।
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छात्रों का गुस्सा इस कदर क्यों फूटा?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि SSC चयन पोस्ट फेज़ तेरह परीक्षा में बडी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। कई छात्रों को परीक्षा के केवल दो दिन पहले एडमिट कार्ड मिला, जबकि तय प्रक्रिया के अनुसार चार दिन पहले एडमिट कार्ड जारी होना चाहिए। कुछ परीक्षाएं बिना किसी सूचना के अंतिम समय पर रद्द कर दी गईं, जिससे दूर दराज से आए छात्रों को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि मानसिक तनाव भी झेलना पडा।
केन्द्रों के चयन में भी भारी गडबडि देखने को मिली। छात्रों ने उदाहरण दिया कि जयपुर के उम्मीदवारों को अंडमान निकोबार भेजा गया, जबकि आवेदन करते समय उन्होंने पास के शहर को प्राथमिकता दी थी। इससे ना सिर्फ़ पैसों का नुकसान हुआ बल्कि परीक्षा के दिन तक यात्रा करना कई छात्रों के लिए असंभव हो गया। तकनीकी गडबडियों और सेंटर पर बदसलूकी की भी शिकायतें सामने आई हैं।
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कई परीक्षा केंद्रों पर सिस्टम क्रैश, सर्वर फेल होना, और माउस मॉनिटर जैसे उपकरण काम ना करना जैसी समस्याएं आईं। कुछ छात्रों ने ये भी आरोप लगाया कि इन्विजीलेटर और सुरक्षाकर्मियों का रवैया अपमानजनक था। सबसे बडा विवाद ‘Eduquity’ नामक एजेंसी की भूमिका पर है। इस परीक्षा का आयोजन एक निजी संस्था ‘Eduquity’ ने किया, जिसे पहले एक अन्य घोटाले में संलिप्त होने के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।
अब यही एजेंसी SSC CGL दो हज़ार पच्चीस जैसी बडी परीक्षा का आयोजन भी करने जा रही है, जिससे तीस लाख से अधिक छात्र प्रभावित होंगे। छात्रों को डर है कि अगर यही एजेंसी आगे भी काम करती रही, तो उनके भविष्य पर संकट गहराता रहेगा। आधार आधारित पहचान प्रक्रिया ने भी बढाई मुश्किलें। बायोमेट्रिक सिस्टम में गड़बड़ियों के कारण कई छात्र एप्लिकेशन भर ही नहीं पाए, और कुछ को परीक्षा केंद्र पर ऑथेंटिकेशन फेल होने की वजह से बाहर कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों की मांग क्या है, Eduquity एजेंसी को तुरंत हटाया जाए। प्रभावित छात्रों को यात्रा और ठहरने का मुआवज़ा दिया जाए। प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। सेंटर अलॉटमेंट व एडमिट कार्ड रिलीज सिस्टम में सुधार किया जाए। सरकार की प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन छात्रों का गुस्सा यह दिखा रहा है कि भारत की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में गंभीर सुधारों की ज़रूरत है। यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में आने वाली परीक्षाओं पर भी सवाल उठना तय है।

