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टिहरी गढ़वाल

TehriGarhwalHouse : टिहरी गढ़वाल हाउस एक हजार करोड़ में बिकने की चर्चा

इस इमारत की जरूरत क्यों बनी?

admin
Last updated: 2026/02/18 at 11:48 AM
admin
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5 Min Read
TehriGarhwalHouse
TehriGarhwalHouse : टिहरी गढ़वाल हाउस एक हजार करोड़ में बिकने की चर्चा
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Highlights
  • एक हजार करोड़ में बिकने की चर्चा.
  • टिहरी गढ़वाल के महाराजा मनुजेंद्र शाह द्वारा इस संपत्ति को एक हजार करोड़ में बेचने की बात कही गई है.
  • यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है. एक हिमालयी रियासत को दिल्ली के केंद्र में इतना बड़ा ठिकाना क्यों चाहिए था?

TehriGarhwalHouse : टिहरी गढ़वाल हाउस एक हजार करोड़ में बिकने की चर्चा :- दिल्ली के लुटियंस बंगलो ज़ोन का टिहरी गढ़वाल हाउस चर्चा में है. इसके 1 हजार करोड़ रुपए में बिकने की बात सामने आई है. यह उत्तराखंड की एक ऐतिहासिक रियासत, दिल्ली के सत्ता-परिसर और बदलते समय के रिश्तों की भी कहानी है. वर्तमान में यह टिहरी राज परिवार की सदस्य और संसद सदस्य माला राज्य लक्ष्मी शाह का आवास है. जानिए, क्या है इसका इतिहास, उत्तराखंड की रियासत ने इसे दिल्ली में क्यों बनवाया और किसने डिजाइन किया।

Contents
इस इमारत की जरूरत क्यों बनी?एक हजार करोड़ में बिकने की चर्चा

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दिल्ली के सबसे विशिष्ट इलाके लुटियंस बंगलो ज़ोन (LBZ) में एक पता इन दिनों खास चर्चा में है. टिहरी गढ़वाल हाउस, 5, भगवान दास रोड. वजह है इसकी कथित संभावित बिक्री. लेकिन यह बंगला केवल महंगी ज़मीन का टुकड़ा और उस पर बना इमारत भर नहीं है. यह उत्तराखंड की एक ऐतिहासिक रियासत, दिल्ली के सत्ता-परिसर और बदलते समय के रिश्तों की भी कहानी है. वर्तमान में यह टिहरी राज परिवार की सदस्य और संसद सदस्य माला राज्य लक्ष्मी शाह का आवास है.आइए, इस महत्वपूर्ण इमारत की बिक्री की चर्चा के बीच इसके इतिहास, भव्यता आदि के बारे में जानते हैं. इसका निर्माण क्यों किया गया था? साथ ही टिहरी गढ़वाल रियासत का संक्षिप्त, लेकिन समृद्ध इतिहास भी जानेंगे।

5, भगवान दास रोड, टिहरी गढ़वाल हाउस के नाम से जानी-पहचानी जाती है. इसका क्षेत्रफल 3.2 एकड़ बताया गया है, जो लगभग 12,950 वर्ग मीटर है यानी दिल्ली के केंद्र में जमीन का इतना बड़ा टुकड़ा मिलना किसी के लिए दुर्लभ है. यह इलाका लुटियंस बंगलो ज़ोन (LBZ) का हिस्सा है जिसे ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस ने 19121930 के बीच डिजाइन किया था. यह दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित आवासीय क्षेत्रों में गिना जाता है।

भव्यता केवल इमारत की सजावट से तय नहीं होती. इस क्षेत्र में भव्यता का बड़ा पैमाना जमीन, लोकेशन खुली जगह आदि माने जाते हैं. जो यहां खूब है. इसके कई कारण भी हैं।

3.2 एकड़ का विशाल प्लॉट: सेंट्रल दिल्ली में इतना बड़ा निजी प्लॉट आज लगभग संग्रहालय-स्तर की दुर्लभता रखता है. बंगले में खुली जगह और बड़े लॉन इसे खास बनाते हैं।

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लोकेशन-पावर: भगवान दास रोड जैसे पते दिल्ली के प्रशासनिक, संवैधानिक, सांस्कृतिक केंद्रों के बेहद पास माने जाते हैं. इसलिए इसे केवल घर नहीं बल्कि एड्रेस-एसेट समझा जाता है।

LBZ की रेगुलेटेड सप्लाई: इस ज़ोन में नई आपूर्ति बहुत सीमित, नियंत्रित मानी जाती है, इसलिए पुराने बड़े बंगलों की कीमतें ट्रॉफी की तरह व्यवहार करती हैं।

इस इमारत की जरूरत क्यों बनी?

यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है. एक हिमालयी रियासत को दिल्ली के केंद्र में इतना बड़ा ठिकाना क्यों चाहिए था? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोरखा आक्रमणों, युद्धों के बाद बने राजनीतिक हालात और बढ़ते ब्रिटिश प्रभाव के दौर में, टिहरी गढ़वाल के शाही परिवार ने दिल्ली में इस तरह की संपत्ति को बनाया, विकसित किया ताकि प्रशासनिक, औपचारिक और नेटवर्किंग संबंधी जरूरतें पूरी हों।

यह भवन साल 1940 के दशक में बना और ब्रिटिश सरकार ने कई रियासतों को लुटियंस दिल्ली में आवास बनाने के लिए जमीन आवंटित की थी. यानी यह बंगला राजसी दिल्ली-उपस्थिति की नीति का हिस्सा भी रहा. टिहरी गढ़वाल हाउस एक तरह से रियासत का दिल्ली वाला दफ्तर, मेहमानखाना, और शक्ति-केंद्रों तक पहुंच का माध्यम बना. यहाँ रिश्ते, औपचारिक मुलाकातें और प्रतिनिधित्व की एक लंबी परंपरा है।

एक हजार करोड़ में बिकने की चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टिहरी गढ़वाल के महाराजा मनुजेंद्र शाह द्वारा इस संपत्ति को एक हजार करोड़ में बेचने की बात कही गई है. खरीदार के बारे में स्पष्ट जानकारी अब तक छपी किसी भी रिपोर्ट में नहीं दिखाई पड़ी. हां, उसे स्थानीय उद्यमी और फूड एंड बेवरेज सेक्टर में मजबूत दखल रखने वाला बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक सौदा अंतिम चरण में है. ऐसे में देखना रोचक होगा कि अगर यह इमारत बिकती है तो यहां किस तरह का नया ढांचा खड़ा होगा या फिर मौजूद इमारत को ही नई साज-सज्जा के साथ तैयार किया जाएगा।

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