खिड़की से दर्शन, फर्श पर प्रसाद : कर्नाटक में भगवान श्रीकृष्ण का एक ऐसा मंदिर है जहां श्रद्धालु सीधे भगवान के दर्शन नहीं कर सकते, बल्कि एक छोटी-सी खिड़की से उनके दर्शन होते हैं. इस मंदिर की बेहद मान्यता है और देश के कोने-कोने से श्रद्धालु मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. आइए इस मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं।
मंदिर में है श्रीकृष्ण की सबसे सुंदर मूर्ति, खिड़की से होते हैं दर्शन
यह मंदिर कर्नाटक के उडुपी में है. इस जगह को पवित्र माना जाता है और भगवान श्रीकृष्ण के भक्त बड़ी तादाद में मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यहां भगवान श्रीकृष्ण बाल रूप में विराजमान हैं. इस मंदिर में दर्शन और पूजा करने वालों का तांता लगा रहता है. मंदिर में कोई भी श्रद्धालु सीधा मूर्ती के दर्शन नहीं कर सकता बल्कि उसे भगवान के दर्शन यहां 9 छिद्रों वाली एक छोटी खिड़की से होते हैं. इसी कारण से इस मंदिर को अनोखा माना जाता है।
मंदिर 13वीं शताब्दी में श्री माधवाचार्य ने स्थापित किया था. इस मंदिर को दक्षिण भारत का सबसे फेमस मंदिरों में गिना जाता है. जन्माष्टमी में मंदिर में काफी भीड़ लगती है और भगवान श्रीकृष्ण की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है. ऐसी मान्यता है कि एक बार श्री माधवाचार्य ने समुद्र में तूफान में फंसे एक जहाज को अपनी दिव्य शक्तियों से बचाया था. जब जहाज किनारे आया तो उसमें श्री कृष्ण की मूर्ती मिली. यह मूर्ति समुद्र की मिट्टी से ढकी थी. इसके बाद माधवाचार्य ने उस मूर्ती को उडुपी लाकर मंदिर में स्थापित कर दिया।
मनोकामना पूर्ण होने पर जमीन पर खाते हैं श्रद्धालु प्रसाद
इस मंदिर में मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु फर्श में रखकर प्रसाद ग्रहण करते हैं. यह मंदिर सुबह 4:30 बजे खोला जाता है. इस वक्त सिर्फ मठ के लोग ही मंदिर में दर्शन करते हैं. इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर सुबह 5 बजे से खुलता है और रात 10 बजे तक खुला रहता है. मंदिर के पास का एयरपोर्ट मेंगलुरु इंटरनेशनल है. यहां से मंदिर की दूरी करीब 59 किमी है. अगर आपने अभी तक यह मंदिर नहीं देखा है तो आप यहां दर्शन कर सकते हैं।


