Airline Jobs Scam : आओ तुम्हें एयरहोस्टस बनाऊं….लड़कियों ने फँसाई लड़कियां :- Jobs in Airlines अपने आप में अनोखे इस कांड की शुरुआत एक ऐसी दुनिया से होती थी, जहां पर सब कुछ बेहद हसीन है. इस हसीन दुनिया की सिर्फ एक झलक इतनी लुभावनी थी कि युवक-युवतियां सब कुछ भूलकर अपने कदम आगे बढ़ा देती थीं. इस हसीन दुनिया के जाल में फंसने वाले तमाम लोगों में एक-दो नहीं, बल्कि 40 पीड़ितों के नाम शामिल थे. लगभग सभी पीड़ितों की कहानी लगभग एक सी थी. इन सभी ने नौकरी की चाहत में अपना नाम ओएलएक्स पर रजिस्टर करा था।
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नाम रजिस्टर होने के साथ उसके मोबाइल फोन पर नई-नई नौकरियों के ऑफर आना शुरू हो गए थे. इन ऑफर्स में एक ऑफर एयरलाइंस में क्रू बनने का भी था. टेलीकॉलर ने पीड़ितों को एयरलाइन क्रू की एक ऐसी हसीन दुनिया दिखाई, जिसके सुनने के बाद उनका दिल दिमाग ना नहीं कह सका. उन्होंने इस नौकरी के लिए हां कर दी. पूरी तरह से अपनी बातों की गिरफ्त में लेने के बाद शुरू हुआ इस गिरोह का असल खेल. इस गिरोह ने पीड़ितों से सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर ₹2,500 मांग लिए।
इसके बाद, यूनिफॉर्म और जूते के नाम पर 5000 से 8000 रुपए लिए गए. इसके बाद, नौकरी लगने की बात कह सैलरी अकाउंट खुलवाने के नाम पर 10,000 से 15,000 रुपए मांगे गए. रुपए मिलने के बाद जिन नंबर से बात हो रही थी वह फोन बंद हो गया. ज्यादातर पीड़ित छोटी रकम होने की वजह से खामोश हो गए, लेकिन इनमें एक पीड़ित ऐसा था, जो अपनी शिकायत लेकर दिल्ली पुलिस के पास पहुंच गया. दिल्ली पुलिस ने इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 7 महिलाओं सहित नौ लोगों को अरेस्ट किया है।
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तिलक नगर के गणेश नगर इलाके में फर्जी कॉल सेंटर पर काम करने वाली लड़कियां पीड़ितों को अपने जाल में फंसाती थीं. इन लड़कियों को इस काम के एवज में ₹15,000 महीना दिया जाता था. पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि इस रैकेट में शामिल टेलीकॉम कंपनी का एक स्टाफ ग्राहकों की बायोमेट्रिक इंफॉर्मेशन का गलत इस्तेमाल कर उनके नाम से फर्जी सिम कार्ड जारी करता था. बाद में यही सिम कार्ड कॉल सेंटर में ठगी के लिए उपयोग किए जाते थे।
तकनीकी डेटा की जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबर और आईएमईआई देशभर में दर्ज 40 से अधिक साइबर फ्रॉड शिकायतों से जुड़े हुए हैं. इससे साफ है कि यह गिरोह एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा था. यह गिरोह OLX पर एयरलाइन जॉब का विज्ञापन डालता था. जैसे ही कोई उम्मीदवार कॉल करता, टेली-कॉलर बड़ी कंपनी का स्टाफ बनकर आगे की प्रक्रिया बताते और चरणों में पैसे वसूलते थे.खबर मीडिया रिपोर्ट्स आप आधारित हैं।

