जार्ज एवरेस्ट मुद्दे पर बवाल शुरू , भाजपा बोली आरोप बेबुनियाद :- भाजपा ने जार्ज एवरेस्ट को लेकर कांग्रेसी आरोपों को बेबुनियाद, तथ्यहीन और राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी प्रदेश प्रवक्ता एवं राजपुर विधायक खजान दास ने कहा, विकास से जुड़े हर अच्छे कार्य का विरोध करना विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। वहीं तंज किया कि जो 70 साल वोट चोरी से सत्ता हथियाते रहे, उनके लिए लोकतांत्रिक तरीके से जनविश्वास हासिल करने पर विश्वास करना मुश्किल है। सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, मसूरी जार्ज एवरेस्ट स्थित भूमि लीज की इस टेंडर प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता से सभी नियम शर्तों का पालन किया गया है। कांग्रेस के पूरी तरह से गलत और असत्य हैं, क्योंकि टेंडर में निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से अनुपालन किया गया है।
देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में टेंडर प्रक्रिया की पूरी जानकारी प्रकाशित की गई जिसके आधार पर तीन कंपनियों ने आवेदन किया और उनके किसी भी निदेशक का नाम समान नही है,जैसा आरोप लगाया जा रहा है। जो जमीन लीज पर दी गई उसमें मात्र 7 एकड़ जमीन ही उपयोग हेतु उचित है, शेष जमीन पहाड़ी ढाल वाली और अनुपयोगी है।
जॉर्ज एवरेस्ट पार्क आवंटन घोटाले के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन
प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा के आह्वान पर पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर प्रदेश सरकार का पुतला दहन किया व ऐलान किया कि इस पूरे घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की घोषणा तक कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा। राजधानी देहरादून में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना व महानगर अध्यक्ष डॉक्टर जसविंदर सिंह गोगी की संयुक्त अगुवाई में कांग्रेस मुख्यालय में एकत्रित कांग्रेस जनों ने पहले जम कर केंद्र सरकार प्रदेश सरकार व पर्यटन मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की व तत्पश्चात जुलूस की शक्ल में राजपुर रोड में क्वालिटी चौक पर राज्य सरकार का पुतला फूंका।
इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष धस्माना ने प्रदेश सरकार पर आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले साढ़े आठ वर्षों में एक के बाद एक घोटाले कर रही इस सरकार ने अब राज्य निर्माण से लेकर अब तक पच्चीस वर्षों का भ्रष्टाचार का सारा रिकॉर्ड जॉर्ज एवरेस्ट पार्क आवंटन घोटाले से तोड़ दिए। धस्माना ने कहा कि यह घोटाला तीस हजार करोड़ से पचास हजार करोड़ तक का है और यह किस के इशारे पर हुआ और कौन कौन लोग इसमें शामिल हैं यह जांच से ही पता चलेगा इसलिए इसकी उच्च स्तरीय जांच हाईकोर्ट के सेटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए।

