राज्य आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड में भू कानून और मूल निवास को लागू करने की मांग की, इसके साथ ही, 10% क्षेतीज आरक्षण की मांग भी की। उन्होंने विधायकों को घेरकर अपनी मांगों का समर्थन किया और धरना दिया।
उत्तराखंड राज्य में भू कानून और मूल निवास को लागू करने की मांग को लेकर राज्य आंदोलनकारियों ने विधायकों को घेरा, और इसके तहत जनप्रतिनिधियों को जगाने का आव्हान किया गया है, और विधानसभा में अपनी मांगों को मुखर करने की मांग की।
उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, सुलोचना भट्ट, और जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने अपने नारों के साथ धरना प्रदर्शन किया।
थोड़ी देर बाद ही हॉस्टल से बाहर आकर खटीमा क़े युवा विधायक व नेता सदन क़े भुवन कापड़ी ने राज्य आंदोलनकारी होने की बात कही और हमेशा राज्य आंदोलनकारियों क़े समर्थन की बात कहीं और राज्य में भू कानून व मूल निवास क़े साथ ही 10% क्षेतीज आरक्षण पर भी पूर्ण सहयोग की बात कही और सभी को संबोधन किया।
पेंशनर संगठन के ओमवीर सिंह और अखिल भारतीय सम्मानता संगठन के एल पी रतूड़ी ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है, और उन्होंने अपने विधायकों को जगाने की बात कही है।
इसके अलावा, देवभूमि युवा संगठन के आशिष उनियाल ने भी इस अभियान को प्रदेश स्तर पर जागरूक करने की अपील की है और सभी को इसमें भागीदार होने की अपील की है।
इस आंदोलन के अंतर्गत, राज्य के प्रवक्ता और जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती और मनोज ज्याड़ा ने विधायकों के आवास और कार्यालय में भू कानून और मूल निवास की छपी हुई अपील बांटने के लिए कार्यवाही की है।
हॉस्टल क़े गेट क़े अन्दर प्रवेश करने लगे तो वंहा गार्ड ने गेट बन्द कर मना किया जिससे तनाव की स्तिथि पैदा होने लगी तभी पुलिस अधिकारी द्वारा हॉस्टल क़े अधिकारी से पूछकर अन्दर जाने की बात कहीं।
राज्य आंदोलनकारियों और हॉस्टल व्यवस्थापक अधिकारी राज कमल के बीच गर्मागर्मी होने लगी ,और अंदर जाने से इनकार करने लगे।
इसके बाद, पुलिस अधिकारी ने एक व्यक्ति के लिए अंदर जाने की बात की, जिसे आंदोलनकारियों ने एक साथ नकारते हुए नारे लगाने लगे। उन्होंने कहा, “ताना शाही नहीं चलेगी, शहीदों का अपमान करना बंद करो, राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा करना बंद करो”।
कुछ ही देर में हॉस्टल से बाहर आकर खटीमा के युवा विधायक और नेता सदन के भुवन कापड़ी ने राज्य आंदोलनकारिय होने की बात कही और हमेशा राज्य आंदोलनकारियों का समर्थन किया।
उन्होंने भू कानून और मूल निवास के साथ ही 10% क्षेतीज आरक्षण पर भी पूर्ण सहयोग की बात कही और सभी को संबोधन किया।
भाजपा के धर्मपुर के विधायक विनोद चमोली ने भी अपने कमरे में पहुंचकर इस आंदोलन का समर्थन किया है, और विधानसभा में आवाज उठाने की मांग की है।
राज्य में भू कानून और मूल निवास के मुद्दे पर आंदोलनकारियों और विधायकों के बीच तनावपूर्ण माहौल बन गया है, और यह मुद्दा राज्य के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।
इसके बारे में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का प्रयास किया जा रहा है, जिससे समस्या का समाधान संभव हो सके।

