संधू ने कहा कि ईको पर्यटन के क्षेत्र में पर्यटन, वन, आयुष सहित अन्य विभाग अपने स्तर पर विभिन्न कार्य कर रहे हैं।
पर्यटकों को ईको टूरिज्म की ओर आकर्षित करने के लिए संबंधित सभी विभागों को पूरा पैकेज तैयार करने का काम करना होगा।
यही कारण है कि उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, उन्होंने कहा।
मुख्य सचिव ने आगे कहा कि प्रदेश में वर्तमान में चलाई जा रही ईको टूरिज्म गतिविधियों से 100 गुना अधिक संभावनाएं हैं।
उन्होंने विभागों के संयुक्त प्रयास की आवश्यकता पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि पर्यटन, वन, ग्रामीण विकास और आयुष विभाग मिलकर ईको पर्यटन योजना पर काम करें।
उन्होंने वन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न ईको पर्यटन गतिविधियों की भी जानकारी प्राप्त की।
संधू ने कहा कि पर्यटन विभाग को वनों के आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी जरूरत है।
यदि आयुष विभाग भी ऐसे क्षेत्रों में और उसके आसपास अपने वेलनेस सेंटर या हर्बल गार्डन स्थापित करता है, तो पर्यटन गतिविधियों को काफी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि पर्यटकों को तब एक पूरा पैकेज दिया जाएगा।
संधू ने बताया कि भारत और विदेशों में हर्बल उत्पादों की काफी मांग है।
उत्तराखंड इस मांग को पूरा करने में काफी सक्षम है।
साथ ही उद्यान-पर्यटन को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर ईको पर्यटन को और बढ़ावा देने का कार्य किया जा सकता है।
मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को यह जांच करने का भी निर्देश दिया कि वन पंचायतों को इस तरह की गतिविधियों से कैसे जोड़ा जा सकता है।
साथ ही उन्होंने पर्यटन विभाग के अधिकारियों को सभी क्षेत्रों में वृहद स्तर पर गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश दिए।

