TestCricketWhiteDress : टेस्ट क्रिकेट में सफेद कपड़े ही क्यों पहनते हैं खिलाड़ी ? :- टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी। उस दौर में क्रिकेट को एक पारंपरिक और लंबे समय तक चलने वाला खेल माना जाता था। उस समय खिलाड़ियों के लिए सफेद शर्ट, सफेद पैंट और कई बार सफेद स्वेटर जैसी पोशाक का इस्तेमाल किया जाता था। समय के साथ खिलाड़ियों की यही पोशाक टेस्ट क्रिकेट की पहचान बन गई। बाद में वनडे और टी20 क्रिकेट में रंगीन जर्सियों का चलन शुरू हुआ, लेकिन टेस्ट क्रिकेट ने अपनी पारंपरिक सफेद ड्रेस को बरकरार रखा।
टेस्ट मैच कई दिनों तक चलते हैं और खिलाड़ियों को लंबे समय तक मैदान पर रहना पड़ता है। सफेद रंग सूर्य की रोशनी का बड़ा हिस्सा रिफलेक्ट करता है, इसलिए यह गहरे रंगों की तुलना में कम गर्मी सोखता है। गर्म और धूप वाले मौसम में इससे खिलाड़ियों को कुछ हद तक आराम मिलता है।
टेस्ट क्रिकेट में आमतौर पर लाल गेंद का इस्तेमाल होता है। सफेद कपड़ों और हरे मैदान पर लाल गेंद को आसानी से देखा जा सकता है। इससे बल्लेबाज, गेंदबाज और फील्डर गेंद की दिशा को बेहतर तरीके से ट्रैक कर पाते हैं। सफेद कपड़ों पर गेंद के निशान और दाग भी जल्दी दिखाई देते हैं। इससे गेंद की स्थिति और उसकी चमक में होने वाले बदलाव को समझने में भी मदद मिल सकती है।
जब वनडे और टी20 क्रिकेट फेमस हुए, तो टीमों ने अपने देश के हिसाब से अलग-अलग रंगों की जर्सियां पहनना शुरू किया। इसके मुकाबले टेस्ट क्रिकेट ने अपनी पारंपरिक सफेद ड्रेस को बनाए रखा। यही वजह है कि आज भी सफेद ड्रेस देखते ही क्रिकेट फैंस को टेस्ट क्रिकेट का ख्याल आता है। यानी टेस्ट क्रिकेट में सफेद ड्रेस सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा, गेंद की विजिबिलिटी और मैदान की परिस्थितियों से जुड़ी पहचान है।

