ParliamentRuckus : बलात्कारियों का बचाव’ टिप्पणी पर संसद में हंगामा, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने :- सवाल सिर्फ एक बयान का नहीं… सवाल उस सियासत का है, जहाँ संसद के भीतर बोले गए शब्द पूरे देश में बहस का मुद्दा बन जाते हैं। लोकसभा में प्रियंका गांधी के एक बयान ने ऐसा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है कि सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। आखिर ऐसा क्या कहा गया कि भाजपा ने इसे चरित्र हनन बताया और माफी की मांग कर दी? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की हर अहम बात।
लोकसभा में शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया, जिन्होंने बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई का समर्थन किया था। प्रियंका गांधी ने कहा कि इस फैसले से देश की करोड़ों बेटियों के सामने गलत संदेश जाता है।
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प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में सिर्फ शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि केंद्र सरकार की शिक्षा नीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है, शिक्षा का बजट पर्याप्त नहीं बढ़ाया जा रहा और संस्थानों में जरूरत से ज्यादा केंद्रीकरण किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में आरएसएस के प्रभाव को बढ़ा रही है।
इतना ही नहीं, कांग्रेस सांसद ने हाल के छात्र आंदोलनों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सवाल पूछा और कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को यह बताना चाहिए कि छात्रों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की अनुमति किसने दी।
हालांकि, प्रियंका गांधी के बयान के तुरंत बाद संसद में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है और यह चरित्र हनन के समान है। रिजिजू ने मांग की कि प्रियंका गांधी के बयान को संसद की कार्यवाही से हटाया जाए और उन्होंने कांग्रेस सांसद से माफी मांगने की भी बात कही।
भाजपा की ओर से शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ गलत जानकारी फैलाई जा रही है और इस तरह के आरोप पूरी तरह अनुचित हैं। उन्होंने भी मांग की कि प्रियंका गांधी अपना बयान वापस लें और संसद से माफी मांगें।
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दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है और संसद में उठाए गए मुद्दे जनता से जुड़े हुए हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि सरकार आलोचना से बचने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी व्यक्ति की छवि खराब करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अब इस पूरे विवाद ने एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है। क्या संसद में नेताओं की भाषा की एक सीमा होनी चाहिए? क्या तीखे राजनीतिक आरोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं या फिर व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए? इन सवालों पर आने वाले दिनों में सियासत और भी गर्म होने की संभावना है।
फिलहाल इस पूरे मामले में सियासी घमासान जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि क्या प्रियंका गांधी अपने बयान पर कायम रहती हैं या फिर संसद की कार्यवाही में कोई नया मोड़ देखने को मिलता है।
आपकी राय क्या है? क्या संसद में इस तरह की भाषा उचित है या नेताओं को अपने शब्दों का और अधिक ध्यान रखना चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट करके जरूर बताइए।

