IntellectualInfrastructure : क्या है अडानी का ‘इंटेलेक्चुअल इंफ्रास्ट्रक्चर’ फॉर्मूला? :- भारत तेजी से फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर यानी नए एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और बुलेट ट्रेन बना रहा है. लेकिन क्या 21वीं सदी की खूंखार चुनौतियों से निपटने के लिए सिर्फ इतना काफी है? अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के डायरेक्टर प्रणव अडानी ने इसका बहुत ही करारा और विज़नरी जवाब दिया है. नई दिल्ली में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (CRF) के स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए प्रणव अडानी ने कहा कि भारत को अब तुरंत अपना ‘इंटेलेक्चुअल इंफ्रास्ट्रक्चर’ (बौद्धिक बुनियादी ढांचा) मजबूत करने की जरूरत है।
प्रणव अडानी ने देश के नीति-निर्माताओं को जगाते हुए कहा कि आज दुनिया के सामने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन बढ़ता शहरीकरण, पानी का संकट और जियोपॉलिटिकल (भौगोलिक-राजनीतिक) जंग जैसे खतरनाक खतरे मंडरा रहे हैं. इनसे निपटने के लिए हमें ऐसे संस्थानों और ‘थिंक टैंक’ की जरूरत है जो तुरंत के फायदों से परे देख सकें. उन्होंने जोर देकर कहा, “हमें ऐसे संस्थानों की जरूरत है जो स्थापित धारणाओं पर सवाल उठाएं, आने वाले खतरों की पहले ही पहचान कर लें और अनिश्चितताओं के बीच देश की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को बनाए रखें.”
विदेशी दिग्गजों ने भी भरी हुंकार
इस महा-मंथन में सिर्फ उद्योगपति ही नहीं, बल्कि विदेशी कूटनीतिज्ञ भी शामिल थे. नॉर्वे के पूर्व जलवायु और पर्यावरण मंत्री एरिक सोलहेम ने अडानी की बातों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आने वाले दशकों में वही देश राज करेगा जो आर्थिक विकास और पर्यावरण सुरक्षा को एक साथ लेकर चलेगा. वहीं, CRF के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने साफ किया कि भारत का बढ़ता वैश्विक दबदबा अब ऐसी संस्थाओं की मांग कर रहा है, जिनमें बौद्धिक ईमानदारी और रणनीतिक स्पष्टता हो।
शशि थरूर का बड़ा समर्थन
इस हाई-प्रोफाइल इवेंट में कांग्रेस के कद्दावर नेता और सांसद डॉ. शशि थरूर ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने भी प्रणव अडानी के विज़न का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को आज ऐसी संस्थाओं की जरूरत है जो बिजली की रफ्तार से बदलती दुनिया को समझ सकें. थरूर ने साफ चेतावनी दी कि जो लोग पब्लिक पॉलिसी बनाते हैं, उन्हें ‘वैचारिक कट्टरता’ और शॉर्ट-टर्म फायदों से बाहर निकलकर इंडस्ट्री के प्रैक्टिकल विचारों को अपनाना होगा।

