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khojinarad HIndi News > खोजी नारद ब्रेकिंग न्यूज़ > AmbubachiMela2026 : विश्व का सबसे बड़ा तांत्रिक मेला है ‘अंबुबाची’
राष्ट्रीय

AmbubachiMela2026 : विश्व का सबसे बड़ा तांत्रिक मेला है ‘अंबुबाची’

'अंबुबाची' शब्द का वास्तव में क्या अर्थ है ?

admin
Last updated: 2026/06/22 at 10:48 AM
admin
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4 Min Read
AmbubachiMela2026
AmbubachiMela2026 : विश्व का सबसे बड़ा तांत्रिक मेला है 'अंबुबाची'
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Highlights
  • असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की.
  • अंबुबाची मेले का महत्व.
  • अंबुबाची' शब्द का भी एक अलग अर्थ है. 'अंबु' का अर्थ है.

AmbubachiMela2026 : विश्व का सबसे बड़ा तांत्रिक मेला है ‘अंबुबाची’ :-  कामाख्या देवी मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. ये मंदिर असम के गुवाहाटी के नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित है. इस मंदिर को बाकी मंदिरों से काफी अलग बताया जाता है. इस मंदिर में कोई प्रतिमा नहीं पूजी जाती, बल्कि एक योनि आकार की शिला की पूजा की जाती है, जिसे स्त्री शक्ति और जीवन के स्रोत का प्रतीक माना जाता है. दूर-दूर से भक्त इस शक्तिपीठ के दर्शन करने आते हैं. यहां साधु संतों और तांत्रिकों की भारी भीड़ उमड़ती है।

Contents
‘अंबुबाची’ शब्द का वास्तव में क्या अर्थ है ?असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था कीअंबुबाची मेले का महत्व

हर साल यहां अंबुबाची मेला लगता है, जिसे पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े मेले में से एक माना जाता है. इस दौरान मंदिर बंद रहता है. मान्यता है कि इस समय देवी राजस्वला होती हैं. इस दौरान हजारों श्रद्धालु, साधु संत और तांत्रिक यहां पहुंचते हैं और माहौल पूरा भक्तिमय हो जाता है. अगले महीने जून में 22 तारीख से 26 तारीख तक अंबुबाची मेले का आयोजन किया जाएगा।

‘अंबुबाची’ शब्द का वास्तव में क्या अर्थ है ?

‘अंबुबाची’ शब्द का भी एक अलग अर्थ है. ‘अंबु’ का अर्थ है पानी और ‘बची’ का अर्थ है शुरुआत. जेठ (असमिया कैलेंडर का दूसरा महीना) महीने के आखिरी तीन दिनों से लेकर आहार-जेठ और ‘सांथ’ का संक्रांति काल तक आहार (असमिया कैलेंडर का तीसरा महीना) महीने की तीसरी तारीख तक माना जाता है।

यह अवधि फसल कटाई के लिए उपयुक्त समय माना जाता है. साथ ही इस अवधि के दौरान परंपरा के अनुसार, कृषि भूमि पर हल नहीं चलाया जाता है. इस अवधि के दौरान कई लोग उपवास भी रखते हैं. ऐसी मान्यता है कि देवी मां कामाख्या आहार महीने की 7 तारीख को ‘आद्या’ नक्षत्र और मिथुन राशि के संयोग से ‘सांथ’ काल के बाद अपने मासिक धर्म में प्रवेश करती हैं. परंपरा के अनुसार इस अवधि के दौरान मंदिर के अंदर किसी भी तरह की पूजा करने से मना किया जाता है. इसलिए कामाख्या मंदिर का मुख्य द्वार अंबुबाची के शुरू होने से तीन दिनों तक बंद रहता है और चौथे दिन नित्य पूजा के बाद मंदिर का मुख्य द्वार भक्तों के लिए खोल दिया जाता है।

असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की

मेले के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा, परिवहन और आवास सुविधाओं के लिए 24 विभागों में 4.55 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। मंदिर अधिकारियों ने सभी ऑफलाइन विशेष दर्शन काउंटरों को भी बंद कर दिया है। विशेष दर्शन के इच्छुक श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पास बुक करना होगा, जबकि सामान्य दर्शन नि:शुल्क रहेंगे।

अंबुबाची मेले का महत्व

मां कामाख्या मंदिर में साल में एक बार अंबुबाची मेला लगता है। । इस मेले से बहुत ही प्राचीन और गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है कि इस वार्षिक मेले के दौरान मां कामाख्या अपने मासिक धर्म यानी रजस्वला से गुजरती हैं। यही कारण है कि इस दौरान देवी मां को पूरा आराम दिया जाता है और मंदिर के मुख्य कपाट तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं। इन तीन दिनों में मंदिर परिसर में किसी तरह की कोई पूजा-अर्चना, आरती या अन्य कोई भी धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते। चौथे दिन, खास शुद्धिकरण अनुष्ठान करने के बादमंदिर के पट भक्तों के लिए खोले जाते हैं। इस साल अंबुबाची मेले की शुरुआत 22 जून 2026 से हो रही है, जो 26 जून तक चलेगा।

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