MonsoonTemple : मौसम की भविष्यवाणी करने वाला मंदिर :- भारत के एक मंदिर को ‘मानसून मंदिर’ के नाम से पूरी दुनिया जानती है, जहां गर्भगृह की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें मानसून के आगमन की सटीक भविष्यवाणी करती मानी जाती हैं. आधुनिक मौसम विज्ञान के हाईटेक उपकरणों के इस दौर में भी यह प्राचीन मंदिर सदियों से किसानों और ग्रामीणों का भरोसा बना हुआ है।
यह मंदिर कानपुर के भीतरगांव ब्लॉक के बेहटा बुजुर्ग गांव में स्थित है और भगवान जगन्नाथ को समर्पित है. इतिहासकारों के अनुसार इसका अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन के काल में हुआ था, जबकि कुछ पुरातत्वविद् इसे सम्राट अशोक के काल का भी मानते हैं. मंदिर की बनावट बौद्ध स्तूप जैसी है और इसमें काले पत्थर की प्राचीन मूर्तियां भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र स्थापित हैं।
मंदिर की दीवारें बहुत मोटी हैं और इन्हें बनाने में विशेष प्रकार के पत्थरों और ईंटों का उपयोग किया गया है. इस वास्तुकला में ऐसा संतुलन है जो आर्द्रता और तापमान के परिवर्तन को अवशोषित करने की क्षमता रखता प्रतीत होता है. मंदिर का ढांचा इतना मजबूत है कि यह सदियों तक बिना बड़े क्षति के टिका रहा है।
जून की चिलचिलाती धूप और उमस वाले महीने में गर्भगृह की छत वाले पत्थर से अचानक पानी की बूंदें टपकने लगती हैं. यदि बूंदें बड़ी और तेजी से गिरती हैं तो इसे भारी वर्षा का संकेत माना जाता है, जबकि छोटी बूंदें सूखे की आशंका दर्शाती हैं. सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि जैसे ही आसमान में बादल छाते हैं और असली बारिश शुरू होती है, छत से पानी टपकना तुरंत बंद हो जाता है।
सदियों से स्थानीय किसान और ग्रामीण लोग फसल बुवाई और कृषि कार्यों की तैयारी के लिए इस मंदिर की भविष्यवाणी पर भरोसा करते आए हैं. इस मंदिर के प्रति आस्था इतनी गहरी है कि लोग आधुनिक मौसम विज्ञान की भविष्यवाणियों के साथ-साथ इस पर विशेष विश्वास रखते हैं. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि जब तक यह मंदिर बूंदें गिरा रहा है, तब तक बारिश नहीं होती, और बूंदें बंद होते ही बारिश शुरू हो जाती है।
पुरातत्व विभाग और कई वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए बार-बार शोध किए और मंदिर के आसपास खुदाई भी की. उन्होंने पाया कि छत पर कोई रिसाव या बाहरी जल स्रोत नहीं है, फिर भी केवल मानसून आने से ठीक 7 से 15 दिन पहले पानी टपकना शुरू हो जाता है. आज तक कोई भी वैज्ञानिक इस अद्भुत घटना का स्पष्टीकरण नहीं दे पाया है, जिससे यह एक अनसुलझी गुत्थी बनी हुई है।

