KalBhairavTemple : भगवान को फूल नहीं, शराब चढ़ाई जाती है :- क्या कभी आपने ऐसा मंदिर देखा है…जहां भगवान को फूल नहीं… शराब चढ़ाई जाती है? और वो शराब… आपकी आंखों के सामने गायब हो जाती है!” मध्य प्रदेश के उज्जैन में काल भैरव मंदिर एक ऐसा ही अनोखा और रहस्यमयी स्थान है, जहां आस्था और रहस्य एक साथ नजर आते हैं। यह मंदिर काल भैरव को समर्पित है, जिन्हें उज्जैन शहर का रक्षक और सेनापति माना जाता है।
बड़ी अपडेट एक क्लिक में :- RammanFestival : हिमालय का रहस्य, जहां देवता खुद उतरते हैं जमीन पर
शिप्रा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर सदियों पुराना है और इसका उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। इतिहास की बात करें तो माना जाता है कि इस मंदिर का मूल निर्माण एक प्राचीन राजा भद्रसेन ने करवाया था।
बाद में मराठा काल में, खासकर पानीपत की तीसरी लड़ाई के बाद, महादजी शिंदे ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। आज भी मंदिर में मराठा शैली की झलक साफ दिखाई देती है।लेकिन इस मंदिर को सबसे ज्यादा खास बनाती है इसकी अनोखी परंपरा—यहां भगवान को प्रसाद के रूप में शराब चढ़ाई जाती है।
मंदिर के बाहर ही आपको प्रसाद की टोकरी मिल जाएगी, जिसमें नारियल, फूल और शराब की बोतल होती है। भक्त यह बोतल पुजारी को देते हैं… और फिर शुरू होता है एक ऐसा दृश्य, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है।
पुजारी शराब को एक तश्तरी में डालते हैं…फिर उसे मूर्ति के होठों के पास ले जाते हैं…और जैसे ही तश्तरी झुकाई जाती है—शराब धीरे-धीरे गायब होने लगती है! न कोई पाइप… न कोई छेद…फिर ये शराब कहां जाती है? मंदिर के पुजारी और कई श्रद्धालु इसे चमत्कार मानते हैं। उनका कहना है कि भगवान स्वयं इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं।
दिलचस्प बात यह भी है कि कहा जाता है—यह चमत्कार केवल पुजारी ही कर सकते हैं। अगर कोई आम व्यक्ति ऐसा करने की कोशिश करे, तो वह असफल रहता है। तांत्रिक परंपरा के अनुसार, यह ‘पंचमकार’ का एक हिस्सा है, जिसमें मद्य यानी शराब भी शामिल है। पहले पांचों अर्पण किए जाते थे, लेकिन अब केवल शराब ही मुख्य रूप से चढ़ाई जाती है, बाकी प्रतीकात्मक रूप में होते हैं।कुछ लोग इसे आस्था का चमत्कार मानते हैं…
तो कुछ इसे विज्ञान की नजर से समझने की कोशिश करते हैं। लेकिन सच क्या है—यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है। हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां आते हैं…कोई विश्वास लेकर… तो कोई सवाल लेकर।*“जहां तर्क खत्म होता है… वहीं से आस्था की शुरुआत होती है।”**
अब सवाल ये है—क्या ये चमत्कार है… या कोई अनसुलझा विज्ञान? फैसला… आपको करना है।

