TheKeralaStory2 : “सच क्या है? सियासत या सिनेमा? सवालों के घेरे में ‘द केरल स्टोरी 2’ :- नमस्कार, आप देख रहे हैं खोजी नारद फिल्मी पर्दे पर एक बार फिर कहानी से ज्यादा चर्चा विवाद की हो रही है। The Kerala Story 2 27 फरवरी को रिलीज होने जा रही है, लेकिन रिलीज से पहले ही फिल्म सुर्खियों में है। ट्रेलर सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस तक, हर जगह फिल्म के कंटेंट और उसके मकसद पर सवाल उठ रहे हैं।
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में माहौल उस समय गरमा गया, जब पत्रकारों ने मेकर्स से सीधे और तीखे सवाल पूछे। सबसे बड़ा सवाल था — अगर फिल्म का नाम ‘केरल स्टोरी 2’ है, तो प्रमोशन के दौरान मंच पर खड़े कथित पीड़ित अलग-अलग राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से क्यों हैं? इस पर निर्माता Vipul Shah ने जवाब दिया कि पहली फिल्म के समय केरल की पीड़ितों को सामने लाया गया था और उनके वीडियो आज भी यूट्यूब पर मौजूद हैं। अगर इस बार भी वही लोग लाए जाते, तो उन पर दोहराव का आरोप लगता।
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हालांकि पत्रकारों का तर्क था कि केरल शिक्षा और सामाजिक विकास में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। ऐसे में फिल्म के जरिए राज्य की छवि खराब करने की कोशिश क्यों की जा रही है? इस पर फिल्म के निर्देशक Kamakhiya Narayan Singh और टीम का कहना था कि अगर किसी राज्य में समस्या है तो उसे उजागर करना गलत नहीं, बल्कि जरूरी है।
विवाद यहीं नहीं थमा। कुछ पत्रकारों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या फिल्म को चुनावी माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है? इस पर मेकर्स ने जवाब दिया कि अगर चुनाव को ध्यान में रखकर फिल्म बनानी होती, तो वे अन्य राज्यों पर भी ऐसा कर सकते थे जहां पहले चुनाव हो चुके हैं।
अब बात करते हैं फिल्म की कहानी की। ट्रेलर की शुरुआत एक चौंकाने वाले बयान से होती है, जिसमें दावा किया गया है कि अगले 25 वर्षों में भारत एक इस्लामिक स्टेट बन सकता है। इसके बाद कहानी तीन अलग-अलग राज्यों — राजस्थान, मध्य प्रदेश और केरल — की घटनाओं को दिखाती है।
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राजस्थान में एक परिवार अपनी नाबालिग बेटी के जबरन धर्म परिवर्तन की शिकायत लेकर थाने पहुंचता है। मध्य प्रदेश में प्यार और शादी के नाम पर धोखे की कहानी दिखाई गई है, जहां एक युवती पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता है। वहीं केरल में एक लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर धार्मिक पहचान का टकराव दिखाया गया है।
फिल्म के ट्रेलर ने जहां एक वर्ग में समर्थन पाया है, वहीं दूसरे वर्ग ने इसे नफरत फैलाने वाली और भ्रामक बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस मुद्दे पर बहस जारी है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा मान रहे हैं, तो कुछ इसे समाज को बांटने वाला नैरेटिव बता रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही है — क्या ‘द केरल स्टोरी 2’ एक सच्ची घटनाओं से प्रेरित सामाजिक चेतावनी है, या फिर यह सिर्फ सनसनी और सियासत का तड़का? जवाब तो दर्शक ही देंगे, जब फिल्म 27 फरवरी को सिनेमाघरों में पहुंचेगी।
फिलहाल इतना ही। सच की तलाश जारी रहेगी, सवाल उठते रहेंगे।

