IndiaReunification : मातृशक्ति को मिले 33 नहीं, 50 प्रतिशत आरक्षण :– देश के पुनः विभाजन की आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि अब भारत में कटने और बंटने के दिन समाप्त हो चुके हैं। 1947 जैसी त्रासदी दोबारा नहीं दोहराई जाएगी, क्योंकि समाज और राष्ट्र दोनों जागृत हैं।
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हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित ‘संघ यात्रा–नये क्षितिज, नये आयाम’ विषयक प्रमुख जन गोष्ठी में उन्होंने कहा कि पूरा विश्व भारत को फिर से नेतृत्व की भूमिका में देख रहा है। एकता को राष्ट्रशक्ति का मूल आधार बताते हुए उन्होंने जनसंख्या कानून, डेमोग्राफिक बदलाव और आरक्षण व्यवस्था पर विस्तार से अपने विचार रखे।
जनसंख्या नीति पर बोलते हुए उन्होंने तीन बच्चों की आवश्यकता का समर्थन किया। उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता की सराहना करते हुए इसे समाज को जोड़ने वाला कदम बताया और पूरे देश में इसे लागू करने की वकालत की। आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह सामाजिक बराबरी के लिए लाया गया था और जब तक मन से भेदभाव समाप्त नहीं होगा, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। उन्होंने सामाजिक सद्भाव को समस्या का स्थायी समाधान बताया।
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महिलाओं को समाज की आधी शक्ति बताते हुए उन्होंने 33 प्रतिशत नहीं, बल्कि 50 प्रतिशत आरक्षण की वकालत की। वहीं लिव-इन संबंधों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारतीय समाज में विवाह संस्था की सामाजिक जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।नई पीढ़ी के संदर्भ में उन्होंने संस्कारयुक्त शिक्षा, तकनीक के संयमित उपयोग और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण का आह्वान किया। भ्रष्टाचार को मन का संस्कार बताते हुए उन्होंने शासन-प्रशासन में आचरण की अनिवार्यता पर भी जोर दिया।

