Criminals : क्रिमिनल्स क्यों रखते हैं कबूतर , पिस्टल, बम ,कट्टा ,चवन्नी जैसे अनोखे नाम ? :- आपने अक्सर अजब गजब नाम वाले अपराधियों की खबरें पढ़ी सुनी होंगी। लेकिन उनके टेढ़े मेढ़े अजीबोगरीब नाम हैरान भी करते हैं। दरअसल अपराध जगत में उपनाम सिर्फ एक नाम नहीं होता, बल्कि यह एक तरह की ‘ब्रांडिंग’ होती है. कई बार यह नाम असली नाम से भी ज्यादा ताकतवर हो जाता है. महफूज नाम शायद बहुत कम लोगों को याद होगा, लेकिन ‘बॉबी कबूतर’ नाम तुरंत ध्यान खींचता है और एक अलग पहचान बनाता है।
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हाल ही में एक ऐसे गैंगस्टर को गिरफ्तार किया है, जिसका नाम सुनते ही अपराध जगत की कई परतें खुलने लगती हैं. हाशिम बाबा और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मोस्ट वांटेड अपराधी महफूज उर्फ ‘बॉबी कबूतर’ की गिरफ्तारी सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह उस अंडरवर्ल्ड की झलक भी दिखाती है, जहां असली नाम से ज्यादा पहचान एक अजीब लेकिन असरदार उपनाम से बनती है।
बॉबी कबूतर का नाम पहले भी कई गंभीर मामलों में सामने आ चुका है. वह फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी के बरेली स्थित घर पर हुई फायरिंग मामले में वांटेड था. इतना ही नहीं, सूत्रों की मानें तो वह मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के घर की रेकी में भी शामिल रहा है. मूसेवाला की हत्या के लगभग चार साल बाद उसकी गिरफ्तारी यह दिखाती है कि अपराध की दुनिया में एक नाम कितने लंबे समय तक पीछा करता रहता है।
अपराधियों के लिए नाम से ज्यादा जरूरी है ‘ब्रांड’
अपराध जगत में उपनाम सिर्फ एक नाम नहीं होता, बल्कि यह एक तरह की ‘ब्रांडिंग’ होती है. कई बार यह नाम असली नाम से भी ज्यादा ताकतवर हो जाता है. महफूज नाम शायद बहुत कम लोगों को याद होगा, लेकिन ‘बॉबी कबूतर’ नाम तुरंत ध्यान खींचता है और एक अलग पहचान बनाता है. अपराधियों के लिए यह उपनाम उनकी छवि बनाने का एक साधन होता है. यह नाम डर पैदा कर सकता है या फिर एक खास तरह की पहचान बना सकता है. कई बार ये नाम इतने लोकप्रिय हो जाते हैं कि पुलिस रिकॉर्ड, मीडिया रिपोर्ट और आम बातचीत में भी वही इस्तेमाल होने लगते हैं।
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इन उपनामों के पीछे कोई नियम नहीं होता, लेकिन इनके बनने की एक दिलचस्प प्रक्रिया जरूर होती है. अक्सर यह नाम उनके साथी, इलाके के लोग या कभी-कभी पुलिस भी दे देती है. कुछ मामलों में अपराधी खुद भी अपना नाम चुनते हैं ताकि उनकी पहचान अलग दिखे या असली नाम छिपा रहे ।
यह नाम आमतौर पर किसी खास विशेषता से जुड़ा होता है, जैसे- किसी की चाल-ढाल, बोलने का तरीका या उसका अपराध करने का स्टाइल. अगर कोई अपराधी बहुत तेजी से वारदात को अंजाम देता है और मौके से भाग जाता है तो उसे ‘कबूतर’ जैसा नाम मिल सकता है. इसी तरह, अगर कोई बहुत खतरनाक माना जाता है, तो उसे ‘कालिया’ या ‘सुल्तान’ जैसे नाम दिए जा सकते हैं।
डर और दबदबा बनाने का तरीका
कुछ उपनाम जानबूझकर ऐसे चुने जाते हैं, जो डर पैदा करें. जैसे कालिया, सुल्तान, डॉन या शेरू. ये नाम सुनते ही आंखों के सामने एक ताकतवर और खतरनाक चेहरा उभरता है.अपराध की दुनिया में यह बहुत जरूरी होता है कि आपका नाम ही आपके काम का संकेत दे. कई बार बिना कुछ किए ही सिर्फ नाम के दम पर लोग डर जाते हैं इसलिए उपनाम एक मनोवैज्ञानिक हथियार की तरह भी काम करता है. यही नहीं कई बार अपराधी खुद अपना उपनाम चुनते हैं।
इसके पीछे दो मुख्य कारण होते हैं, पहला, अपनी पहचान को अलग और खतरनाक बनाना और दूसरा, अपने असली नाम को छिपाना. जब कोई अपराधी ‘बॉबी कबूतर’ जैसे नाम से जाना जाता है, तो उसके असली नाम तक पहुंचना आसान नहीं होता. ये चालाकी पुलिस से बचने में भी मदद करती है क्योंकि कई बार अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग नामों से पहचान बनाई जाती है।

