VastuShastra : घर बनाते समय ग्रहों के गोचर पर कीजिए विचार :- वास्तु शास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है. इसमें घर को बनवाने से लेकर उसमें रहने तक के सभी नियम बताए गए हैं. मान्यता है कि वास्तु के अनुसार, बनाए गए घर में हमेशा खुशियों का वास होता है. वहीं घर बनवाते समय अगर वास्तु शास्त्र में बताए गए नियमों की अनदेखी की जाती है, तो जीवन परेशानियों से घिर सकता है. आर्थिक तंगी आ सकती है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर बनवाते समय शुभ मुहूर्त आदि देखे जाते हैं।
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ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में यह मान्यता है कि जिस प्रकार प्रत्येक वस्तु का आरंभ और अंत होता है, उसी प्रकार घर का भी एक निश्चित जीवनकाल होता है. घर का निर्माण शुरू करते समय वास्त की स्थिति और आठों आयों (ध्वजय, धूम्रय, काकय, सिंहय, वृषभय, गजय और खरय) का गहन अध्ययन किया जाता है. आइए जानते हैं कि क्या घर बनवाते समय ग्रहों के गोचर पर भी विचार करना चाहिए? ज्योतिषाचार्य इस बारे में क्या सलाह देते हैं?
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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, आज भी, 200, 400 या 500 वर्ष पूर्व निर्मित घरों का अच्छी स्थिति में होना यह दर्शाता है कि निर्माणकर्ताओं ने वास्तु के नियमों के साथ-साथ ग्रहों के गोचर का भी ध्यान रखा था. ज्योतिषविदों के अनुसार, घर की आयु जानने के लिए कुछ ग्रहों की स्थिति पर विचार किया जाता है. अगर घर बनवाते समय किसी की कुंडली में बुध के लग्न में है, तो उसके भवन की आयु 50 साल हो सकती है।
ग्रह गोचर से निर्धारित होती है घर की आयु
वहीं अगर घर बनवाते समय किसी की कुंडली में बृहस्पति लग्न से चौथे भाव में और चंद्रमा ग्यारहवें भाव में हो, तो उसके भवन की आयु 80 वर्ष मानी जा सकती है. शास्त्रों के अनुसार, अगर घर बनवाते समय किसी की कुंडली में बृहस्पति लग्न में, शुक्र चौथे भाव में और सूर्य छठे भाव में है, तो उसके घर की आयु 120 वर्ष हो सकती है।

