यहाँ पैदा होना वरदान ,रहस्य या संयोग ? :- आज हम आपको लेकर चल रहे हैं एक ऐसे गांव में, जहां पैदा होना क्या सच में वरदान है, कोई रहस्य है या फिर सिर्फ एक अद्भुत संयोग? उत्तर प्रदेश के उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में स्थित माधोपट्टी गांव को देशभर में “आईएएस की फैक्ट्री” के नाम से जाना जाता है।
महज करीब 75 घरों वाले इस छोटे से गांव ने वो कर दिखाया, जिसका सपना देश के लाखों युवा देखते हैं।देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली यूपीएससी को पास करना आसान नहीं। लाखों छात्र बड़े शहरों में जाकर सालों मेहनत करते हैं, कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, तब कहीं जाकर कुछ गिने-चुने अभ्यर्थियों का चयन हो पाता है। लेकिन जौनपुर का माधोपट्टी गांव इस मायने में बेहद खास है कि यहां लगभग हर घर से कोई न कोई अधिकारी निकला है।
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राजधानी लखनऊ से करीब 300 किलोमीटर दूर बसे इस गांव की कहानी सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सच है।इस प्रेरक यात्रा की शुरुआत साल 1952 में हुई, जब डॉ. इंदुप्रकाश ने यूपीएससी में दूसरी रैंक हासिल कर आईएएस बने।
इसके बाद उन्होंने फ्रांस सहित कई देशों में भारत के राजदूत के रूप में सेवा दी। उनके इस ऐतिहासिक चयन ने गांव की तस्वीर बदल दी। डॉ. इंदुप्रकाश के बाद उनके चार भाई भी आईएएस बने और यहीं से माधोपट्टी को “आईएएस की फैक्ट्री” कहा जाने लगा।
यह सिलसिला यहीं नहीं रुका—अगली पीढ़ी ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाया। साल 2002 में उनके बेटे यशस्वी आईएएस बने और 31वीं रैंक हासिल की। 1994 में इसी परिवार के अमिताभ सिंह भी आईएएस बने और नेपाल में राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
माधोपट्टी की खास बात यह है कि यहां केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाओं ने भी प्रशासनिक सेवा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। 1980 में आशा सिंह, 1982 में ऊषा सिंह और 1983 में इंदु सिंह अधिकारी बनीं।
अमिताभ सिंह की पत्नी सरिता सिंह आईपीएस बनीं। यही नहीं, इस गांव से कई पीसीएस अधिकारी भी निकले हैं, जिनमें राजमूर्ति सिंह, विद्या प्रकाश सिंह, प्रेमचंद्र सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह, जय सिंह, प्रवीण सिंह, विशाल विक्रम सिंह, विकास विक्रम सिंह, एसपी सिंह, वेद प्रकाश सिंह, नीरज सिंह और रितेश सिंह शामिल हैं। वहीं पारूल सिंह, रितू सिंह, रोली सिंह और शिवानी सिंह जैसी महिलाओं ने भी पीसीएस में सफलता पाई।एक छोटा सा गांव, सीमित संसाधन, लेकिन बड़े सपने और उससे भी बड़ी लगन—यही माधोपट्टी की असली पहचान है। यहां का माहौल, परिवारों में शिक्षा को दी जाने वाली प्राथमिकता और एक-दूसरे से मिलने वाली प्रेरणा ने इसे देश के नक्शे पर खास बना दिया है।
लोग दूर-दूर से इस गांव को देखने आते हैं, यह जानने कि आखिर यहां ऐसा क्या है जो लगातार प्रशासनिक अधिकारी पैदा कर रहा है। तो क्या यहां जन्म लेना वरदान है? क्या यह कोई रहस्य है? या फिर यह वर्षों की मेहनत, अनुशासन और शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम है? जवाब शायद इन सबके बीच कहीं छिपा है इस प्रेरक कहानी के साथ आज के इस विशेष पैकेज में बस इतना ही।आप देखते रहिए खोजी नारद*— “जहां हर खबर के पीछे छिपा है एक सच।”

