SanatanDharma : सनातन धर्म के पांच देवों की अहमियत :- नमस्कार आप देख रहे हैं खोजी नारद “जहां आस्था के साथ जुड़ती है सत्य की खोज, सनातन धर्म, जिसे विश्व की सबसे प्राचीन और शाश्वत जीवन पद्धति माना जाता है, केवल पूजा या आस्था तक सीमित नहीं बल्कि जीवन को संतुलन, प्रकृति के सम्मान और नैतिक मूल्यों के साथ जीने की शिक्षा देता है।
वेदों, उपनिषदों और पुराणों में वर्णित इस परंपरा में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के चार पुरुषार्थों के माध्यम से मनुष्य के संपूर्ण विकास का मार्ग बताया गया है। सनातन परंपरा में ब्रह्मांड के संचालन को पांच दिव्य शक्तियों से जोड़ा गया है, जिन्हें पंचदेव कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव, भगवान विष्णु, ब्रह्मा जी, भगवान गणेश और मां दुर्गा को पंचदेव के रूप में पूजा जाता है, जबकि कुछ परंपराओं में सूर्य देव को भी पंचदेवों में प्रमुख स्थान दिया गया है। मान्यता है कि सृष्टि के पांच मूल तत्व — वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी और आकाश — इन्हीं देव शक्तियों के प्रतीक हैं और इनकी पूजा से जीवन में संतुलन, ऊर्जा और सकारात्मकता बनी रहती है।
सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है क्योंकि उनका प्रकाश संपूर्ण संसार को जीवन देता है, इसलिए पूजा की शुरुआत भी अक्सर सूर्य अर्घ्य से की जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है और हर शुभ कार्य से पहले उनकी वंदना करने की परंपरा है ताकि कार्य बिना बाधा के पूर्ण हो सके।
वहीं भगवान शिव और मां दुर्गा को सृष्टि की मूल चेतना और शक्ति का स्वरूप माना जाता है, जहां शिव संहार और पुनर्निर्माण के प्रतीक हैं तो मां दुर्गा प्रकृति और ऊर्जा का आधार मानी जाती हैं। भगवान विष्णु को जगत का पालनहार कहा गया है, जो सृष्टि के संतुलन और संरक्षण का दायित्व निभाते हैं, और यही कारण है कि सनातन परंपरा में उनके जागरण के बाद ही कई शुभ कार्य आरंभ किए जाते हैं।
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वास्तु शास्त्र में भी पंचदेवों का विशेष महत्व बताया गया है, जहां दिशाओं के अनुसार देवताओं की स्थापना से घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का वास माना जाता है। सनातन धर्म की विशेषता इसकी समावेशी सोच और तर्क की स्वतंत्रता है, जहां आस्था के साथ ज्ञान और प्रकृति के प्रति सम्मान को समान महत्व दिया गया है।
पंचदेव की उपासना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवन के पांच मूल तत्वों के प्रति कृतज्ञता और संतुलन का संदेश भी देती है, जो मनुष्य को आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर सशक्त बनाती है। इसी संदेश के साथ कि आस्था हमें जोड़ती है, संतुलन हमें संभालता है और ज्ञान हमें आगे बढ़ाता है — आज के इस विशेष प्रस्तुति में बस इतना ही। आप देखते रहिए खोजी नारद — सच की तलाश, आस्था के साथ।
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