PulwamaAttack : एक धमाका… और पूरे देश की धड़कन थम गई — और खुशियों से भरा दिन बदल गया मातम में :- नमस्कार, आप देख रहे हैं खोजी नारद। आज क ये दिन उस दिन की याद डिलाटा जब प्यार के जश्न का दिन पूरे देश के लिए दर्द, आंसू और बलिदान की याद बन गया।सोचिए… एक सामान्य दोपहर।जवान अपने कर्तव्य की ओर बढ़ रहे थे। कुछ साथी हंसी-मजाक कर रहे थे, कोई फोन पर घर की बात याद कर मुस्कुरा रहा था, तो कोई ड्यूटी पर पहुंचकर छुट्टी की योजना बना रहा था। सब कुछ सामान्य था… लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों में सब बदलने वाला है।
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14 फरवरी 2019… जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सीआरपीएफ के जवानों का लंबा काफिला आगे बढ़ रहा था। लगभग 78 गाड़ियों में ढाई हजार से ज्यादा जवान अपने-अपने कैंप की ओर जा रहे थे। मौसम शांत था, सड़क सामान्य थी… और जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही थी।तभी… पुलवामा के लेथपोरा इलाके के पास अचानक एक कार तेज रफ्तार से काफिले की ओर बढ़ती दिखाई देती है। पहले किसी को शक नहीं होता। लेकिन अगले ही पल वो कार जवानों से भरी बस की ओर मुड़ती है…और फिर…एक भयानक धमाका। कुछ सेकंड के लिए सब कुछ सन्नाटे में बदल गया।
चारों तरफ धुएं का गुबार, चीख-पुकार, टूटी गाड़ियां और बिखरा मलबा। धमाका इतना जोरदार था कि कई किलोमीटर दूर तक उसकी आवाज सुनाई दी। धमाका इतना भयानक था कि बस के परखच्चे उड़ गए। कई जवान मौके पर ही शहीद हो गए। सड़क पर हर तरफ अफरातफरी मच गई। साथी जवान अपने साथियों को बचाने की कोशिश में दौड़ पड़े, लेकिन दृश्य इतना भयावह था कि कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
जब धुआं छंटा, तो सामने जो मंजर था, उसने हर दिल को दहला दिया। सड़क पर तबाही का दृश्य था। साथी जवान अपने घायल साथियों को बचाने की कोशिश में दौड़ रहे थे। कोई मदद के लिए चिल्ला रहा था, कोई अपने दोस्त को उठाने की कोशिश कर रहा था।
उस हमले ने एक ही पल में 40 से ज्यादा जवानों को हमसे छीन लिया। उस एक धमाके ने 40 से ज्यादा घरों की खुशियां छीन लीं।कहीं मां का बेटा नहीं लौटा…
कहीं पत्नी का इंतजार हमेशा के लिए अधूरा रह गया… कहीं बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया… तो कहीं बहन ने अपना भाई खो दिया।
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पूरा देश स्तब्ध था। टीवी स्क्रीन पर आती तस्वीरें देख लोगों की आंखें नम हो रही थीं। हर शहर, हर गांव में लोग सड़कों पर उतरकर शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहे थे। देश का हर नागरिक उस दर्द को महसूस कर रहा था। is घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया। हर दिल में सवाल था — आखिर कब तक? लेकिन इसी दर्द के बीच देश ने अपने वीर जवानों को सलाम किया और उनके परिवारों के साथ खड़ा हुआ।
आज भी जब 14 फरवरी आती है, तो सिर्फ प्यार का दिन नहीं, बल्कि बलिदान और यादों का दिन बनकर सामने आती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा के लिए हमारे जवान अपनी जान तक न्यौछावर कर देते हैं।और शायद इसलिए कहा जाता है —
जवान सीमा पर खड़े हैं, तभी हम अपने घरों में सुरक्षित हैं।शहीद भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी बहादुरी और बलिदान हमेशा देश के दिल में जिंदा रहेंगे। वो चले गए… लेकिन उनका साहस, उनका बलिदान और उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।

