AutismEqualRates : ऑटिज़्म की दर ‘पुरुषों और महिलाओं में बराबर ! :- अक्सर ऑटिज्म का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में छोटे लड़कों की छवि उभरती है। लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि यह समस्या कम उम्र के लड़कों में ज्यादा आम है, लेकिन हाल ही में आई एक नई रिपोर्ट ने इन पुराने अनुमानों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और एक नई सच्चाई सामने रखी है। क्या आपको भी लगता है कि ऑटिज्म केवल लड़कों को होने वाली समस्या है? अगर हां, तो यह खबर आपकी सोच बदल सकती है। सालों से हम यही मानते आए हैं कि यह बीमारी कम उम्र के लड़कों में सबसे ज्यादा होती है, लेकिन एक नई रिपोर्ट ने इस पुराने दावे को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है। विज्ञान की दुनिया में आए इस नए मोड़ ने शोधकर्ताओं को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।
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एक स्टडी में बताया गया है किऑटिज़्म की दर ‘पुरुषों और महिलाओं में लगभग बराबर’ है, जो इसके फैलाव के बारे में पिछली मान्यताओं को चुनौती देती है. हालांकि यह न्यूरोलॉजिकल और डेवलपमेंटल स्थिति छोटे लड़कों में ज़्यादा आम मानी जाती है.ऑटिज़्म को लेकर एक बड़ा शोध हुआ है, जिसके परिणाम चौंकाने वाले हैं. जी हां सही सुना आपने दरअसल स्टडी में बताया गया है कि ऑटिज़्म की दर ‘पुरुषों और महिलाओं में लगभग बराबर’ है, जो इसके फैलाव के बारे में पिछली मान्यताओं को चुनौती देती है. हालांकि यह न्यूरोलॉजिकल और डेवलपमेंटल स्थिति छोटे लड़कों में ज़्यादा आम मानी जाती है, लेकिन स्वीडिश शोधकर्ताओं ने पाया कि किशोर लड़कियों में इसके डायग्नोसिस में बड़ी बढ़ोतरी हुई है।
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शोधकर्ताओं ने कहा कि BMJ में पब्लिश हुई यह स्टडी इस बात पर ज़ोर देती है कि इस बात की जांच की जाए कि लड़कियों और महिलाओं को लड़कों और पुरुषों की तुलना में ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) का डायग्नोसिस बाद में क्यों मिलता है।
स्वीडन की लेटेस्ट रिसर्च में, एकेडमिक्स ने 1985 और 2000 के बीच देश में पैदा हुए 2.7 मिलियन से ज़्यादा लोगों में ऑटिज़्म के डायग्नोसिस रेट की जांच की और 2022 तक उन्हें ट्रैक किया. इस दौरान, लगभग 2.8% लोगों को ASD का डायग्नोसिस हुआ. उन्होंने पाया कि डायग्नोसिस में पुरुष-महिला अनुपात समय के साथ कम होता गया, इस हद तक कि ‘बड़े होने पर इसे पहचानना मुश्किल हो सकता है।

