BlackBudget2026 : बजट सिर्फ आंकड़े नहीं, देश की अर्थव्यवस्था की असली कहानी :- आज हम बात करेंगे भारत के बजट इतिहास के उस दौर की, जिसे देश का सबसे कठिन और चर्चित बजट कहा जाता है, यानी 1973 का ‘ब्लैक बजट’, और साथ ही समझेंगे कि आज के बजट 2026 से यह कितना अलग है। साल 1973 में पेश किया गया बजट भारत के आर्थिक इतिहास का सबसे मुश्किल समय माना जाता है। उस समय देश इंदिरा गांधी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा था और वित्त मंत्री यशवंतराव बी. चव्हाण ने यह बजट पेश किया था।
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इसे ‘ब्लैक बजट’ इसलिए कहा गया क्योंकि उस साल सरकार को लगभग 550 करोड़ रुपये का भारी घाटा दिखाना पड़ा, जो उस दौर के हिसाब से बहुत बड़ा था। इससे पहले देश ने इतना बड़ा बजट घाटा कभी नहीं देखा था। इस घाटे की सबसे बड़ी वजह थी 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध, जिसमें देश को भारी आर्थिक खर्च उठाना पड़ा।
युद्ध के बाद देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ गया और सरकारी खजाना कमजोर हो गया। इसके तुरंत बाद देश ने सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना भी किया, जिससे खेती पर बुरा असर पड़ा और उत्पादन घट गया। जब खेती कमजोर पड़ती है तो देश की आमदनी भी घटती है, जबकि खर्च बढ़ता जाता है। यही कारण था कि उस समय सरकार की आय कम और खर्च ज्यादा हो गया और बजट घाटा तेजी से बढ़ गया।
उस दौर में महंगाई भी बढ़ रही थी, बेरोजगारी की समस्या थी और देश के कई हिस्सों में गरीबी और भुखमरी की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे मुश्किल समय में सरकार ने कुछ बड़े फैसले भी लिए, जैसे कोयला खदानों, बीमा कंपनियों और इंडियन कॉपर कॉर्पोरेशन के राष्ट्रीयकरण का कदम उठाया गया ताकि ऊर्जा और संसाधनों पर सरकारी नियंत्रण मजबूत हो सके और देश की जरूरतें पूरी की जा सकें। लेकिन आम लोगों को उस समय महंगाई और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, इसलिए यह बजट लंबे समय तक चर्चा में रहा और ‘ब्लैक बजट’ के नाम से जाना जाने लगा।
अब अगर हम इसकी तुलना बजट 2026 से करें तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है। आज भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सरकार का फोकस विकास, उत्पादन और निवेश बढ़ाने पर है। बजट 2026 में सरकार ने रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर बड़ा खर्च बढ़ाया है। कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने के लिए टैक्स कम किया गया है, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सोलर सेक्टर को बढ़ावा दिया जा रहा है, और देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
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हालांकि कुछ क्षेत्रों जैसे शेयर बाजार ट्रेडिंग और कुछ आयातित सामान पर टैक्स बढ़ने से खर्च बढ़ सकता है, लेकिन कुल मिलाकर सरकार का फोकस अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और उत्पादन बढ़ाना है। जहां 1973 का बजट संकट और आर्थिक मजबूरी की कहानी कहता था, वहीं 2026 का बजट विकास, आत्मनिर्भरता और भविष्य की तैयारी की तस्वीर दिखाता है। उस समय सरकार को खर्च कम करने और अर्थव्यवस्था को संभालने की चुनौती थी, जबकि आज सरकार निवेश बढ़ाकर रोजगार और उद्योग को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि हर साल बजट सिर्फ पैसों का हिसाब नहीं होता, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति और सरकार की प्राथमिकताओं का आईना भी होता है।
1973 का ब्लैक बजट हमें याद दिलाता है कि देश ने कितने कठिन दौर देखे हैं, जबकि आज का बजट यह दिखाता है कि भारत अब विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसलिए जब भी बजट की बात होती है, इतिहास के ये पन्ने हमें यह समझाते हैं कि आर्थिक फैसले सिर्फ आज को नहीं, बल्कि आने वाले कई वर्षों के भविष्य को भी तय करते हैं।

