AshwamedhYajna : मंत्री सतपाल महाराज का मिशन यज्ञ ! :- अश्वमेध यज्ञ वैदिक धर्म और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था जो राजाओं द्वारा आयोजित किया जाता था यह राज्य की शक्ति और समृद्धि को बढ़ाने के लिए किया जाता था। उत्तराखंड में भी अश्वमेध यज्ञ होने के अवशेष मिले हैं। हमारा मानना है कि अश्वमेध यज्ञ की जो पूजा की जाति थी वैसी ही पूजा यहां भी की जाये।
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ये कहना है प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज का जो अपने निजी आवास पर आयोजित पुरातत्व विभाग विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के पश्चात कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के जनपद देहरादून के कालसी हरिपुर में राजा शीलवर्मन ने लगभग 1700 साल पहले चार अश्वमेध यज्ञ किए थे जिसका प्रमाण यहां खुदाई में मिली तीन वेद यज्ञ वेदिकाएं हैं और चौथी वेदिका की खुदाई की जा रही है।
महाराज ने बताया कि उत्तरकाशी जनपद के पुरोला में भी अश्वमेध यज्ञ के अवशेष मिले हैं। यह यज्ञ वेदिकाएं वैदिक धर्म और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जिनके संरक्षण के साथ-साथ उन स्थानों पर पूजा अर्चना और अनुष्ठान आदि के विषय में चर्चा की गई। बैठक में आर्कियोलॉजिकल विभाग के सुपरिटेंडेंट डा. मोहन चंद्र जोशी, गढ़वाल विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ नागेंद्र रावत, सुनील नेगी, दून विश्वविद्यालय के डा. मानवेंद्र बड़थ्वाल, गुरुकुल महिला महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर कन्या अर्चना डिमरी आदि उपस्थित थे।
73 साल बाद एक बार फिर से खुदाई शुरू
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) देहरादून मंडल ने तीसरी शताब्दी के अश्वमेध यज्ञ स्थली पर करीब 73 साल बाद एक बार फिर से खुदाई शुरू की है. ताकि और अधिक जानकारी मिल सके. ट्रायल के तौर पर की जा रही खुदाई में आर्कियोलॉजिस्ट की टीम को मिट्टी का मटका और कोयले के अवशेष मिले हैं. उतराखंड को धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है. यहां पर कई ऐतिहासिक स्थल भी हैं. देहरादून जिले के विकासनगर के जगतग्राम बाड़वाला में स्थित अश्वमेध स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन है।
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भारतीय सर्वेक्षण के आर्कियोलॉजिस्ट टीएन रामचंद्रन ने सन 1952-54 में इस जगह पर उत्खनन किया था. जहां तीसरी शताब्दी के अश्वमेध यज्ञ का पता चला था.भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण देहरादून मंडल द्वारा 1 दिसंबर 2025 से स्थल पर खुदाई शुरू हुई थी. इस खुदाई का उद्देश्य यही है कि पूर्व में जो वेदिकाएं निकली थी, उसके अलावा चौथी का भी अनुमान लगाना और यहां का कल्चरल सीक्वेंस जानना है।

