ChildAbuseIndia : रिश्तों की नींव को हिला देने वाले शर्मनाक अपराध :- मां की गोद और पिता का साया जिनसे सुरक्षा का एहसास मिलता है, जब वही डर का कारण बन जाएं, तो बचपन हमेशा के लिए टूट जाता है। ये घटनाएं सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि उन चीखों और खामोशियों की कहानी हैं जो इंसानी सभ्यता पर गहरा धब्बा है।जब रिश्तों, वर्दी या घर की चहारदीवारी के पीछे हैवानियत पलती है, तब मासूमियत सबसे पहले कुचली जाती है।
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ऐसे मामलों में सवाल सिर्फ सजा का नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भी बन जाता है। क्या आप सोच सकते हैं कि कोई बाप अपनी मासूम सी बेटी का बलात्कार कर सकता है! लेकिन ऐसा हो रहा है। हैरत की बात है कि आज के अखबारों में ऐसी एक नहीं, अनेक खबरें प्रकाशित हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स से साभार लिया गया ये आर्टिकल जान जागरूकता के लिए ज़रूर पढ़ें –
देहरादून की पॉक्सो अदालत ने पूर्व वायुसेना कर्मी को अपनी नाबालिग बेटी से कई सालों तक शोषण करने पर 20 साल की सख्त कैद और ₹25,000 जुर्माने की सजा सुनाई। जज अर्चना सागर ने माना कि आरोपी ने बेटी को छह साल की उम्र से ही यह कहकर शोषण किया कि यह ‘नॉर्मल’ है और पिता का प्यार दिखाने का तरीका है। परिवार अलग-अलग राज्यों में पोस्टिंग पर रहा और हर जगह यह अपराध दोहराया गया।
मां के अस्पताल में रहने या बेटे के इलाज के दौरान भी शोषण जारी रहा। छोटा भाई स्पेशल नीड्स वाला है और दूसरा गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। आरोपी पत्नी से भी मारपीट करता था। अदालत ने IPC की धारा 376, 377, 506 और पॉक्सो एक्ट की धारा 5 व 6 के तहत दोषी माना। पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों को भरोसेमंद मानते हुए अदालत ने कहा कि आरोप पूरी तरह साबित हुए हैं और आरोपी को कड़ी सजा दी गई।
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दिल्ली की एक अदालत ने 9 जनवरी को एक 37 वर्षीय व्यक्ति को अपनी 11 साल की बेटी से बार-बार दुष्कर्म करने पर उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि इस अपराध ने मानवता के सबसे पवित्र रिश्ते को शर्मनाक तरीके से तोड़ दिया। आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और बलात्कार के आरोपों में दोषी पाया गया। अभियोजक आदित्य कुमार ने अधिकतम सजा की मांग की और अदालत ने इसे स्वीकार किया। कितनी हैरत की बात है कि पीड़िता की बुआ ने सबूत नष्ट करने में मदद किया।
अदालत ने उसकी भूमिका को स्वीकार किया लेकिन नरमी बरती क्योंकि वह दो बच्चों की मां है। उसे ₹20,000 जुर्माना भरने का आदेश दिया गया। पीड़िता ने अदालत को बताया कि वह अब भी मानसिक आघात और डरावनी यादों से जूझ रही है। जज ने इसे मुआवजे के लिए उपयुक्त मामला मानते हुए पीड़िता को ₹10.5 लाख क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।
बाप पर दो बेटियों से बार-बार दुष्कर्म का आरोप
राजस्थान के जोधपुर में 45 वर्षीय पिता पर अपनी दो बेटियों से कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगा। बड़ी बेटी ने 13 जनवरी को पुलिस को ईमेल भेजकर शिकायत की। उसने बताया कि पिता ने पिछले 12 सालों से उसका शोषण किया है और हाल ही में एक महीने पहले भी यह कृत्य किया। उसने कहा कि पिता ने छह साल की उम्र से ही धमकाकर शोषण शुरू किया और कहा कि अगर उसने किसी को बताया तो जान से मार देगा।
छोटी बहन, जो 15 साल की है, ने भी हाल ही में शोषण की बात बताई। दोनों बहनों ने मां को बताया और फिर पुलिस को ईमेल किया। शिकायत के आधार पर नागौरी गेट थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2) और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ। आरोपी केस दर्ज होने के बाद फरार हो गया था, लेकिन गुरुवार शाम पुलिस ने उसे पकड़ लिया। बेटियों के बयान दर्ज कर लिए गए और मेडिकल जांच भी कराई गई। अब आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
लड़की की डायरी से खुला राज, रिश्तेदार ने किया था कुकर्म
साउथ दिल्ली के एक जंगल में 18 साल की कॉलेज छात्रा की हत्या के सात महीने बाद पुलिस ने उसके एक रिश्तेदार को हिरासत में लिया है। आरोप है कि उसने लड़की के साथ उस वक्त यौन शोषण किया था, जब वह नाबालिग थी। यह मामला तब सामने आया, जब लड़की की मौत के बाद उसकी डायरी मिली। पुलिस के मुताबिक, लड़की की मां ने उसके सामान में रखी डायरी देखी, जिसमें उसने लिखा था कि 6 से 12 साल की उम्र के बीच रिश्तेदार ने उसका यौन शोषण किया।
आरोपी उस समय खुद भी नाबालिग था। डायरी में यह भी दर्ज था कि आरोपी उसे धमकाता था कि अगर उसने किसी को बताया तो नुकसान पहुंचाएगा। नवंबर 2025 में पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ और हाल ही में आरोपी को पकड़ा गया, लेकिन गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि अपराध के वक्त वह नाबालिग था।
1 जून 2025 को छात्रा की हत्या कथित तौर पर उसके 18 वर्षीय क्लासमेट ने की थी। उसी दिन मां ने बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में आरोपी ने कबूल किया कि उसने लड़की को जंगल बुलाकर चाकू से हमला किया, गला दबाया और शव को जलाने की कोशिश की। पुलिस ने उसके बयान के आधार पर शव बरामद किया और हत्या और साजिश के मामले में केस दर्ज किया।
इन फैसलों ने एक बार फिर याद दिलाया है कि हैवानियत अक्सर बाहर से नहीं, बल्कि घर के भीतर से जन्म लेती है। ये सजाएं सिर्फ अपराधियों के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम बच्चों के लिए एक संदेश हैं जो आज भी डर के कारण चुप हैं।
कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन समाज की जिम्मेदारी इससे कहीं बड़ी है। समय रहते सवाल पूछना, भरोसे के नाम पर हो रहे जुल्म को पहचानना और हर उस चुप्पी को तोड़ना, जो किसी मासूम की जिंदगी निगल रही है। इन घटनाओं से तो मन में बरबस यही बात उमड़ती है- देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान…

