StrayDogCounting : लावारिस कुत्ते गिनेंगे गुरुजी – अजब गजब आदेश :- भारत के कई राज्यों (जैसे उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, यूपी) में सरकारों ने हाल ही में प्रोफेसरों और प्राचार्यों को लावारिस कुत्तों की गिनती करने और उनके प्रबंधन में मदद करने का काम सौंपा है, जिसके कारण शिक्षकों में नाराजगी है क्योंकि यह उनके शिक्षण कार्यों से अतिरिक्त बोझ है और इस पर उनका कहना है कि यह काम शिक्षा विभाग का नहीं, बल्कि स्थानीय निकायों का है, जिसके लिए उन्हें अलग से मेहनताना भी नहीं मिलता। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद आया है, लेकिन शिक्षक इसे शिक्षा के माहौल के लिए हानिकारक और अपने काम में बाधा मानते हैं।
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अब डिग्री कॉलेज के प्राचार्य पढ़ाने के साथ ही आसपास के क्षेत्र में घूम रहे लावारिस कुत्तों की गिनती भी करेंगे। इस अभियान के लिए उत्तराखंड शासन ने प्रत्येक महाविद्यालय के प्राचार्य को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। विश्वविद्यालय स्तर पर यह जिम्मेदारी कुलसचिव को सौंपी गई है। कुत्तों की गणना के बाद इसकी रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन को देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तराखंड में भी सरकारी स्तर पर लावारिस कुत्तों को नियंत्रित करने के उपाय किए जा रहे हैं। इन्हीं उपायों के तहत संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा की ओर से जारी एक आदेश शिक्षाविदों में चर्चा का विषय बन गया है।
शिक्षकों की प्रतिक्रिया
अतिरिक्त बोझ: शिक्षकों का कहना है कि उन्हें पढ़ाने के अलावा चुनाव, जनगणना और अब यह काम भी सौंपा जा रहा है, जिससे उनका मुख्य कार्य प्रभावित हो रहा है।
अपमानजनक: कई शिक्षक इसे अपने पेशे का अपमान मानते हैं, क्योंकि यह काम स्थानीय नगर पालिका या पशु कल्याण विभाग का होना चाहिए।
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गैर-शैक्षणिक कार्य: शिक्षक मानते हैं कि यह उनके शिक्षण और छात्रों के मार्गदर्शन के मुख्य कार्य से ध्यान भटकाता है।
शिक्षकों को क्या करना है?
अपने स्कूल और आसपास के इलाकों में लावारिस कुत्तों की गिनती करना।
स्थानीय प्रशासन को रिपोर्ट करना और कुत्तों के पुनर्वास में मदद करना।
स्कूल परिसर को सुरक्षित बनाना।
यह एक सरकारी पहल है जो शिक्षाविदों के बीच विवाद का विषय बन गई है, क्योंकि वे इसे अपने मुख्य कर्तव्यों से भटकाने वाला मानते हैं, जबकि सरकार इसे एक ज़रूरी कदम बता रही है। संयुक्त शिक्षा निदेशक की ओर से जारी इस आदेश पर प्राफेसरों ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है। शिक्षकों का काम बच्चों को शिक्षा और ज्ञान देने का है ताकि बेहतर राष्ट्र, बेहतर नागरिक और बेहतर समाज बन सके। शासन और सरकार को भी चाहिए कि वह शिक्षकों को सम्मान दे लेकिन दुर्भाग्य है कि अब शिक्षक अध्यापन छोड़कर आवारा कुत्तों की गणना करेंगे। यह निर्णय शिक्षक और शिक्षा जगत के लिए अपमानजनक है।

