दवाओं पर घटा टैक्स, सस्ता होगा इलाज :- फार्मास्युटिकल और हेल्थकेयर सेक्टर के लिए हाल ही में की गई जीएसटी (GST) में सुधार की घोषणा भारत के चिकित्सा इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है. सरकार के इस कदम को सिर्फ कर दरों के सरलीकरण के रूप में नहीं देखा जा सकता यह एक ऐसे परिवर्तन की शुरुआत है जो मरीजों के लिए इलाज को अधिक किफायती बनाएगा उद्योग के अनुपालन तंत्र को सरल करेगा और भारत को ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ से आगे बढ़ाकर एक वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में ले जाएगा।
दवाओं पर जीएसटी दर में बड़ी कटौती
जीएसटी काउंसिल ने सितंबर 2025 में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अधिकांश दवाओं पर जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% कर दिया है. वहीं, 36 जीवनरक्षक दवाओं जिनमें कैंसर, रेयर बीमारियों और गंभीर रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं को जीएसटी से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है.यह फैसला सीधे तौर पर मरीजों की जेब पर असर डालेगा. भारत में अब भी ‘आउट ऑफ पॉकेट’ स्वास्थ्य खर्च यानी अपनी जेब से इलाज कराने का बोझ दुनिया के कई देशों की तुलना में अधिक है. ऐसे में दवाओं की कीमत में हर छोटी राहत लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकती है।
कैंसर दवाओं की कीमतों में भारी कमी
बीते एक साल में सरकार ने टैक्स ढांचे में लगातार सुधार करते हुए दवाओं के दाम घटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. फरवरी 2025 में वित्त मंत्रालय ने कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में कटौती की थी. अब यह शुल्क सीआईएफ (Cost, Insurance, and Freight) मूल्य पर लगभग 10% तक सीमित कर दिया गया है. इससे दवा निर्माताओं और आयातकों की लागत कम हुई और उसका सीधा फायदा मरीजों को मिला।
इसके बाद, सितंबर 2025 में जीएसटी काउंसिल ने मेडिकल डिवाइस और दवाओं पर जीएसटी को 12% से घटाकर 5% कर दिया. कुछ विशेष श्रेणियों में तो यह दर प्रभावी रूप से 0% तक पहुंच गई है. कुल मिलाकर, इन सुधारों से उपभोक्ताओं को करीब 14.20% तक की बचत होने का अनुमान है जो स्वास्थ्य क्षेत्र में किसी ‘फिस्कल मेडिसिन’ से कम नहीं।
जीएसटी दरों में कटौती का सीधा असर दवाओं के खुदरा मूल्य पर देखने को मिलेगा. मरीजों के लिए यह राहत भरा कदम होगा, जबकि उद्योग जगत के लिए यह ब्रांड विश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करने का अवसर है. हालांकि, यह सुधार कंपनियों पर यह जिम्मेदारी भी डालता है कि टैक्स कटौती का पूरा लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए ।

