Dev Anand की वो 7 सदाबहार फिल्में : – देव आनंद… हिंदी सिनेमा का वो नाम, जिनकी मुस्कान, अदाएँ और अनोखा अंदाज़ हर किसी के दिल में बस जाता है। आज हम आपको उनकी 7 बेहतरीन और सदाबहार फिल्मों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें देखकर आप भी उनकी अदाकारी के दीवाने हो जाएंगे।
सबसे पहले बात करते हैं साल 1954 की फिल्म “टैक्सी ड्राइवर” की। चेतन आनंद के निर्देशन में बनी इस फिल्म में देव आनंद ने ‘मंगल’ नाम के टैक्सी ड्राइवर का किरदार निभाया, जो माला नाम की लड़की को गुंडों से बचाता है और फिर दोनों के बीच प्यार पनपता है।
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अब चलते हैं 1967 की ओर… फिल्म “ज्वेल थीफ” । इस फिल्म में देव आनंद के साथ अशोक कुमार, वैजयंतीमाला और तनुजा जैसे सितारे नज़र आए। रहस्यमयी कहानी और सस्पेंस से भरी इस फिल्म ने दर्शकों को खूब रोमांचित किया।
1958 में आई फिल्म “कालापानी” भी देव साहब की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक रही। इसमें वो एक ऐसे बेटे का रोल निभाते हैं, जो अपने पिता पर लगे झूठे हत्या के इल्ज़ाम को मिटाने के लिए संघर्ष करता है। इस फिल्म में उनके साथ मधुबाला ने स्क्रीन शेयर की थी।
इसके बाद आती है “जॉनी मेरा नाम” । यह फिल्म देव आनंद के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक मानी जाती है। हेमा मालिनी के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आई, और इसके गाने तो आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
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साल 1971 में देव साहब ने निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा फिल्म “हरे राम हरे कृष्णा” के साथ। यह म्यूजिकल ड्रामा फिल्म भाई-बहन के रिश्ते और समाज के बदलते रंगों को खूबसूरती से दर्शाती है।
देव आनंद की फिल्मोग्राफी की बात हो और “गाइड” का जिक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। वहीदा रहमान के साथ उनकी यह फिल्म एक मास्टरपीस मानी जाती है। “राजू गाइड” का किरदार देव आनंद के करियर की पहचान बन गया, जो अंत में एक इंसान से “भगवान” तक का सफर तय करता है।
और आख़िर में 1956 की फिल्म “सी.आई.डी.” । इस इन्वेस्टिगेशन थ्रिलर में देव आनंद ने एक पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में अपनी एक अलग छाप छोड़ी।
तो ये थीं देव आनंद की 7 सबसे शानदार फिल्में, जो आज भी उतनी ही ताज़ा और यादगार हैं, जितनी अपने दौर में थीं। अगर आपने इन्हें अब तक नहीं देखा है, तो मौका ज़रूर निकालिए… और देव साहब के जादू को एक बार फिर महसूस कीजिए।

