क्या आपने देखा है 17 मंजिला “पाप कटवा मंदिर” : उत्तराखंड में स्थित ऋषिकेश, जिसे योगनगरी भी बोला जाता है, सिर्फ़ योग और अध्यात्म के लिए ही नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के मंदिरों के लिए भी मशहूर है। यहां गंगा नदी की कलकल धारा और हिमालय की गोद में बसे अनेक तीर्थस्थल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं। इन धार्मिक स्थलों में एक अत्यंत विशिष्ट और ऊंचा मंदिर है, 17 मंजिला सीताराम मंदिर, जिसे सियाराम धाम के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि ऋषिकेश का 13 मंजिला मंदिर (त्र्यंबकेश्वर मंदिर) अधिक मशहूर है लेकिन 17 मंजिला सीताराम मंदिर अपनी ऊंचाई और दिव्यता के कारण अनोखा जगह रखता है। यह मंदिर ऋषिकेश का सबसे ऊंचा मंदिर माना जाता है और यह न सिर्फ़ अपनी बनावट बल्कि अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए भी मशहूर है।
यह भव्य मंदिर गंगा तट के पास स्थित है और इसकी ऊंचाई के कारण दूर से ही इसकी भव्यता का दर्शन हो जाता है। इस मंदिर की 17 मंजिलों में हर एक तल पर विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां और मंदिर हैं, जिससे भक्तों को एक ही जगह पर अनेक तीर्थों का अनुभव होता है। यहां भगवान शिव, विष्णु, राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, दुर्गा, गणेश, राधा-कृष्ण समेत अनेक देवताओं की भव्य मूर्तियां विराजमान हैं।
सीताराम मंदिर का रोचक इतिहास
सीताराम मंदिर से जुड़ी एक जरूरी धार्मिक कथा यह है कि जब त्रेता युग में भगवान राम ने रावण का वध किया था, तब उन्हें ब्रह्महत्या गुनाह लगा था। इस गुनाह से मुक्ति पाने के लिए उनके गुरु वशिष्ठ ने उन्हें केदारखंड (वर्तमान उत्तराखंड) में तप करने की राय दी। इसी उद्देश्य से भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ ऋषिकेश आए। जब वे तपोवन क्षेत्र में पहुंचे, तो मां गंगा ने स्वयं उनके स्वागत में अपना प्रवाह तेज किया और उस स्थल को पवित्र कर दिया। यह मान्यता आज भी लोगों में श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है और यही कारण है कि इस मंदिर के पास से बहती गंगा की धारा विशेष रूप से तेज और पवित्र मानी जाती है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहां स्नान करने और मंदिर में दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में शांति एवं समृद्धि प्राप्त होती है।
आध्यात्मिक शांति का स्थल सियाराम धाम
मंदिर की ऊंचाई न सिर्फ़ इसे स्थापत्य की दृष्टि से सुन्दर बनाती है बल्कि प्रत्येक मंजिल पर पूजा और ध्यान के लिए विशेष जगह भी मौजूद कराती है। श्रद्धालु सीढ़ियों से चढ़ते हुए हर मंजिल पर भिन्न-भिन्न देवी-देवताओं का दर्शन करते हैं और एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव करते हैं। मंदिर से गंगा का दृश्य अत्यंत मनोहारी लगता है और यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा भी भक्तों को आध्यात्मिक शांति से भर देता है।

